लिमटी की लालटेन 759
अनाधिकृत वेंडर्स, पेंट्री में मंहगाई की मार, आखिर कैसे सुधरेगा रेलवे में खान पान . . .
चलती रेलगाड़ी में अवैध वैंडर्स, पेंट्री ठेकेदार पर लगाम लगाने में दिलचस्पी क्यों नहीं लेते माननीय . . .
(लिमटी खरे)
बचपन से यही सुनते आ रहे हैं जिसमें भारतीय रेलवे के द्वारा समय समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि भारतीय रेल के संचालन और सुविधाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा, लेकिन बचपन से आज तक जबसे होश संभाला तब से लगभग पांच दशकों से यही देख रहे हैं कि रेलवे में हादसे दर हादसे, समय की पाबंदी का अभाव, रेल के अंदर दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं जिसमें साफ सफाई और खानपान विशेष रूप से उल्लेखित है, की स्थिति बहुत ज्यादा दयनीय ही नजर आती है।इस आलेख को वीडियो में देखने के लिए क्लिक कीजिए . . .https://www.youtube.com/watch?v=SDQA8sggejs
एक समय था जब राजधानी एक्सप्रेस ही सर्वश्रेष्ठ मानी जाती थी। इस रेलगाड़ी के टिकिट में खाना, नाश्ता, चाय आदि सब कुछ का समावेश होता था। इसें वेंडर्स सामान बेचते नजर नहीं आते थे। आज अत्याधुनिक वंदे भारत के युग में राजधानी एक्सप्रेस में वेंडर्स चाय, नमकीन, समोसे, भजिए बेचते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं जिन रेलगाड़ियों को विशेष सुविधा या प्रीमियम वाला बताया जाता है, उनमें भोजन की गुणवत्ता अक्सर स्वास्थ्य के मानकों पर खरी नहीं उतरती। एक यात्री के न केवल स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता नजर आता है, वरन उसकी जेब तराशी भी जमकर ही होती दिखती है।
रेलवे के आंकड़ों पर ही अगर आप गौर करें तो स्थिति की गंभीरता आईने के मानिंद ही साफ नजर आती है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे खानपान की शिकायतों में भारी इजाफा हुआ है। इसमें औसतन हर रोज 35 से ज्यादा यात्री खराब खाने को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं। सरकार ने राज्यसभा में खुद स्वीकार किया था कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान खाने-पीने की गुणवत्ता को लेकर 6,645 शिकायतें प्राप्त हुईं। वर्ष 2021 से लेकर अगले चार वर्षों में रेलवे को कुल 19,174 शिकायतें खानपान से संबंधित मिलीं।
इसमें की गई शिकायतों की प्रकृति डराने वाली है। भोजन में तिलचट्टे , कीड़े या अन्य अखाद्य वस्तुओं का मिलना अब एक आम खबर बन चुकी है। इसके अलावा, यात्रियों से तय कीमत से अधिक राशि वसूलना और भोजन की कम मात्रा देना भी एक बड़ी समस्या है। दुखद पहलू यह है कि जब कोई जागरूक यात्री खराब भोजन पर आपत्ति जताता है, तो कई बार रेल कर्मियों या वेंडर्स द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आती हैं।
कहने को तो रेलवे के पास एक विस्तृत निगरानी ढांचा है। आईआरसीटीसी के तहत आधुनिक बेस किचन से खाना बनवाने का दावा किया जाता है। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर सीसीटीवी से निगरानी की बात कही जाती है। इतना ही नहीं इसके लिए खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की तैनाती के दावे भी किए जाते हैं। अगर यह सब कुछ कागजों तक ही सीमित नहीं है तो फिर शिकायतों का अंबार क्यों!
रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जब शिकायतें आती हैं, तो रेलवे जुर्माने लगाने, चेतावनी देने या काउंसलिंग जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करता है। लेकिन ये उपाय इस मर्ज की दवा के बजाय केवल मलहम की तरह काम कर रहे हैं। जुर्माना भरने के कुछ समय बाद ठेकेदार फिर से वही ढर्रा अपना लेते हैं।
अब यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि रेलवे अपने मौजूदा केटरिंग मेकेनिज्म तंत्र के जरिए यात्रियों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन देने में विफल है, तो वह वैकल्पिक रास्तों पर विचार क्यों नहीं करता? इसके लिए क्या ट्रेनों में भोजन की आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की नामी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए? क्या खराब भोजन पर ठेका रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई स्थाई रूप से लागू नहीं की जा सकती?
सवाल यही है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे! रेलवे चूंकि केंद्र का मसला है इसलिए यहां सुनवाई सिर्फ और सिर्फ चुने हुए सांसदों की ही होती है, आम जनता की आवाज तो नक्कारखाने में तूती के मानिंद ही साबित होती है। आपने कभी सुना है कि किसी सांसद ने सदन में रेलवे की लेट लतीफी, जनता को मिलने वाली सुविधाओं को कागजों पर होना, बुजुर्गों को मिलने वाली रियायत आरंभ करने, रेलवे के स्तरहीन खान पान और साफ सफाई का मसला संसद में उठाया हो!
हां आम आदमी पार्टी के सांसद राजीव चढ्ढ़ा ने सदन में एयर पोर्ट पर 100 रूपए का पानी, 250 की चाय और 350 के समोसे का मामला उठाया तब जाकर इस मसले पर सुनवाई हो पाई। विमानतल पर अगर रेट कम हो सकते हैं तो रेलवे में अवैध वेण्डर्स को क्या रोका नहीं जा सकता! क्या टीटीई उनको देखकर कुछ नहीं कहते, क्या रेलवे सुरक्षा बल उनसे चौथ लेता है! क्या रेलवे की साफ सफाई और खानपान के स्तर को सुधारने की बात सांसद नहीं कर सकते!
आईए अब हम आपको बताते हैं कि अगर रेल में आपको कोई शिकायत हो तो आप क्या करें। रेलवे रेलवे की खराब खानपान व्यवस्था और शिकायतों के समाधान के लिए रेल मदद ऐप और अन्य डिजिटल माध्यम एक गेम-चेंजर साबित हुए हैं। आप इसमें कैसे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं यह बताते हैं। रेल मदद पोर्टल और ऐप है, आप इसे डाऊनलोड कर सकते हैं। यह रेलवे का एक ऐसा मंच है जो चौबीसों घंटे काम करता है। यदि आपको ट्रेन में खराब खाना (जैसे कीड़ा मिलना या बदबू आना) मिला है, तो आप ऐप पर तुरंत फोटो अपलोड कर सकते हैं। आप इसके केटरिंग सेक्शन में जाकर फुड क्वालिटी, ओवर चार्जिंग, अनप्रोफेशनल बिहेवियर चुन सकते हैं। शिकायत दर्ज होन के बाद आपको एक रिफरेंस नंबर मिलेगा, जिसके जरिए आप देख सकते हैं कि आपकी शिकायत पर क्या कार्यवाही की गई है।
इसके अलावा आप ट्विटर या एक्स के जरिए भी कार्यवाही करवा सकते हैं। सोशल मीडिया का यह प्लेटफार्म फिलहाल जवाबदेही तय करने के लिए सबसे गतिवाला माना जा रहा है। आप एक्स पर जाकर रेल मिनिस्टर इंडिया, आईआरसीटीसी ऑफिशियल या संबंधित रेलवे जोन को सर्च करिए, आपको उनके एकाऊॅट मिलेंगे, जिसमें आप अपनी समस्या के साथ अपना पीएनआर, ट्रेन का नंबर, कोच व बर्थ लिखकर भेज दीजिए। अक्सर आपकी शिकायत के दस मिनिट के अंदर ही कोई न कोई आपसे संपर्क करता है और अगले स्टेशन पर जहां भी रेलगाड़ी रूकेगी कोई न कोई अधिकारी आकर आपकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगा।
इसके बाद नंबर आता है हेल्पलाईन नंबर 139 का। अगर आपके पास इंटरनेट नहीं है, तो आप सीधे 139 डायल कर इस पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें कैटेरिंग सेवाओं के लिए विशेष विकल्प होता है। यह नंबर बहुत उपयोगी साबित हो रहा है रेलवे में।
अब जानिए कि आपकी शिकायत के बाद क्या होता है? जब आप डिजिटल माध्यम से शिकायत करते हैं, तो प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है। संबंधित स्टेशन के मुख्य खानपान निरीक्षक को तुरंत मैसेज जाता है। अगले बड़े स्टेशन पर वेंडर से सैंपल लिया जा सकता है या मौके पर मौजूद खाने की जांच की जाती है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो वेंडर पर पांच हजार रूपए से लेकर 1 लाख रूपए तक का जुर्माना लगाया जाता है। बार-बार गलती होने पर ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
अमूमन आप यात्री को या तो यह सब पता नहीं होता है या वह झंझट में पड़ना नहीं चाहता। यह आपका अधिकार है, अगर आप साु सफाई या खानपान में कमी पाते तो आप इसकी शिकायत जरूर करें। सांसदों को चाहिए कि वे रेलवे को इसके लिए पाबंद कराएं कि हर कोच के अंदर यह सब जानकारी चस्पा रहे। वहां रेट लिस्ट टंगी रहे ताकि वेंडर ज्यादा राशि न वसूल कर सके।
लिमटी की लालटेन के 759वें एपीसोड में फिलहाल इतना ही। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में लिमटी की लालटेन अब हर रोज सुबह 07 बजे प्रसारित की जा रही है। आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की वेब साईट या साई न्यूज के चेनल पर जाकर इसे रोजाना सुबह 07 बजे देख सकते हैं। अगर आपको लिमटी की लालटेन पसंद आ रही हो तो आप इसे लाईक, शेयर व सब्सक्राईब अवश्य करें। हम लिमटी की लालटेन का 760वां एपीसोड लेकर जल्द हाजिर होंगे, तब तक के लिए इजाजत दीजिए . . .
(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)
(साई फीचर्स)
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अनाधिकृत वेंडर्स, पेंट्री में मंहगाई की मार, आखिर कैसे सुधरेगा रेलवे में खान पान . . .
चलती रेलगाड़ी में अवैध वैंडर्स, पेंट्री ठेकेदार पर लगाम लगाने में दिलचस्पी क्यों नहीं लेते माननीय . . .
(लिमटी खरे)
बचपन से यही सुनते आ रहे हैं जिसमें भारतीय रेलवे के द्वारा समय समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि भारतीय रेल के संचालन और सुविधाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा, लेकिन बचपन से आज तक जबसे होश संभाला तब से लगभग पांच दशकों से यही देख रहे हैं कि रेलवे में हादसे दर हादसे, समय की पाबंदी का अभाव, रेल के अंदर दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं जिसमें साफ सफाई और खानपान विशेष रूप से उल्लेखित है, की स्थिति बहुत ज्यादा दयनीय ही नजर आती है।इस आलेख को वीडियो में देखने के लिए क्लिक कीजिए . . .https://www.youtube.com/watch?
एक समय था जब राजधानी एक्सप्रेस ही सर्वश्रेष्ठ मानी जाती थी। इस रेलगाड़ी के टिकिट में खाना, नाश्ता, चाय आदि सब कुछ का समावेश होता था। इसें वेंडर्स सामान बेचते नजर नहीं आते थे। आज अत्याधुनिक वंदे भारत के युग में राजधानी एक्सप्रेस में वेंडर्स चाय, नमकीन, समोसे, भजिए बेचते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं जिन रेलगाड़ियों को विशेष सुविधा या प्रीमियम वाला बताया जाता है, उनमें भोजन की गुणवत्ता अक्सर स्वास्थ्य के मानकों पर खरी नहीं उतरती। एक यात्री के न केवल स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता नजर आता है, वरन उसकी जेब तराशी भी जमकर ही होती दिखती है।
रेलवे के आंकड़ों पर ही अगर आप गौर करें तो स्थिति की गंभीरता आईने के मानिंद ही साफ नजर आती है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे खानपान की शिकायतों में भारी इजाफा हुआ है। इसमें औसतन हर रोज 35 से ज्यादा यात्री खराब खाने को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं। सरकार ने राज्यसभा में खुद स्वीकार किया था कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान खाने-पीने की गुणवत्ता को लेकर 6,645 शिकायतें प्राप्त हुईं। वर्ष 2021 से लेकर अगले चार वर्षों में रेलवे को कुल 19,174 शिकायतें खानपान से संबंधित मिलीं।
इसमें की गई शिकायतों की प्रकृति डराने वाली है। भोजन में तिलचट्टे , कीड़े या अन्य अखाद्य वस्तुओं का मिलना अब एक आम खबर बन चुकी है। इसके अलावा, यात्रियों से तय कीमत से अधिक राशि वसूलना और भोजन की कम मात्रा देना भी एक बड़ी समस्या है। दुखद पहलू यह है कि जब कोई जागरूक यात्री खराब भोजन पर आपत्ति जताता है, तो कई बार रेल कर्मियों या वेंडर्स द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आती हैं।
कहने को तो रेलवे के पास एक विस्तृत निगरानी ढांचा है। आईआरसीटीसी के तहत आधुनिक बेस किचन से खाना बनवाने का दावा किया जाता है। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर सीसीटीवी से निगरानी की बात कही जाती है। इतना ही नहीं इसके लिए खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की तैनाती के दावे भी किए जाते हैं। अगर यह सब कुछ कागजों तक ही सीमित नहीं है तो फिर शिकायतों का अंबार क्यों!
रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जब शिकायतें आती हैं, तो रेलवे जुर्माने लगाने, चेतावनी देने या काउंसलिंग जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करता है। लेकिन ये उपाय इस मर्ज की दवा के बजाय केवल मलहम की तरह काम कर रहे हैं। जुर्माना भरने के कुछ समय बाद ठेकेदार फिर से वही ढर्रा अपना लेते हैं।
अब यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि रेलवे अपने मौजूदा केटरिंग मेकेनिज्म तंत्र के जरिए यात्रियों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन देने में विफल है, तो वह वैकल्पिक रास्तों पर विचार क्यों नहीं करता? इसके लिए क्या ट्रेनों में भोजन की आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की नामी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए? क्या खराब भोजन पर ठेका रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई स्थाई रूप से लागू नहीं की जा सकती?
सवाल यही है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे! रेलवे चूंकि केंद्र का मसला है इसलिए यहां सुनवाई सिर्फ और सिर्फ चुने हुए सांसदों की ही होती है, आम जनता की आवाज तो नक्कारखाने में तूती के मानिंद ही साबित होती है। आपने कभी सुना है कि किसी सांसद ने सदन में रेलवे की लेट लतीफी, जनता को मिलने वाली सुविधाओं को कागजों पर होना, बुजुर्गों को मिलने वाली रियायत आरंभ करने, रेलवे के स्तरहीन खान पान और साफ सफाई का मसला संसद में उठाया हो!
हां आम आदमी पार्टी के सांसद राजीव चढ्ढ़ा ने सदन में एयर पोर्ट पर 100 रूपए का पानी, 250 की चाय और 350 के समोसे का मामला उठाया तब जाकर इस मसले पर सुनवाई हो पाई। विमानतल पर अगर रेट कम हो सकते हैं तो रेलवे में अवैध वेण्डर्स को क्या रोका नहीं जा सकता! क्या टीटीई उनको देखकर कुछ नहीं कहते, क्या रेलवे सुरक्षा बल उनसे चौथ लेता है! क्या रेलवे की साफ सफाई और खानपान के स्तर को सुधारने की बात सांसद नहीं कर सकते!
आईए अब हम आपको बताते हैं कि अगर रेल में आपको कोई शिकायत हो तो आप क्या करें। रेलवे रेलवे की खराब खानपान व्यवस्था और शिकायतों के समाधान के लिए रेल मदद ऐप और अन्य डिजिटल माध्यम एक गेम-चेंजर साबित हुए हैं। आप इसमें कैसे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं यह बताते हैं। रेल मदद पोर्टल और ऐप है, आप इसे डाऊनलोड कर सकते हैं। यह रेलवे का एक ऐसा मंच है जो चौबीसों घंटे काम करता है। यदि आपको ट्रेन में खराब खाना (जैसे कीड़ा मिलना या बदबू आना) मिला है, तो आप ऐप पर तुरंत फोटो अपलोड कर सकते हैं। आप इसके केटरिंग सेक्शन में जाकर फुड क्वालिटी, ओवर चार्जिंग, अनप्रोफेशनल बिहेवियर चुन सकते हैं। शिकायत दर्ज होन के बाद आपको एक रिफरेंस नंबर मिलेगा, जिसके जरिए आप देख सकते हैं कि आपकी शिकायत पर क्या कार्यवाही की गई है।
इसके अलावा आप ट्विटर या एक्स के जरिए भी कार्यवाही करवा सकते हैं। सोशल मीडिया का यह प्लेटफार्म फिलहाल जवाबदेही तय करने के लिए सबसे गतिवाला माना जा रहा है। आप एक्स पर जाकर रेल मिनिस्टर इंडिया, आईआरसीटीसी ऑफिशियल या संबंधित रेलवे जोन को सर्च करिए, आपको उनके एकाऊॅट मिलेंगे, जिसमें आप अपनी समस्या के साथ अपना पीएनआर, ट्रेन का नंबर, कोच व बर्थ लिखकर भेज दीजिए। अक्सर आपकी शिकायत के दस मिनिट के अंदर ही कोई न कोई आपसे संपर्क करता है और अगले स्टेशन पर जहां भी रेलगाड़ी रूकेगी कोई न कोई अधिकारी आकर आपकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगा।
इसके बाद नंबर आता है हेल्पलाईन नंबर 139 का। अगर आपके पास इंटरनेट नहीं है, तो आप सीधे 139 डायल कर इस पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें कैटेरिंग सेवाओं के लिए विशेष विकल्प होता है। यह नंबर बहुत उपयोगी साबित हो रहा है रेलवे में।
अब जानिए कि आपकी शिकायत के बाद क्या होता है? जब आप डिजिटल माध्यम से शिकायत करते हैं, तो प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है। संबंधित स्टेशन के मुख्य खानपान निरीक्षक को तुरंत मैसेज जाता है। अगले बड़े स्टेशन पर वेंडर से सैंपल लिया जा सकता है या मौके पर मौजूद खाने की जांच की जाती है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो वेंडर पर पांच हजार रूपए से लेकर 1 लाख रूपए तक का जुर्माना लगाया जाता है। बार-बार गलती होने पर ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
अमूमन आप यात्री को या तो यह सब पता नहीं होता है या वह झंझट में पड़ना नहीं चाहता। यह आपका अधिकार है, अगर आप साु सफाई या खानपान में कमी पाते तो आप इसकी शिकायत जरूर करें। सांसदों को चाहिए कि वे रेलवे को इसके लिए पाबंद कराएं कि हर कोच के अंदर यह सब जानकारी चस्पा रहे। वहां रेट लिस्ट टंगी रहे ताकि वेंडर ज्यादा राशि न वसूल कर सके।
लिमटी की लालटेन के 759वें एपीसोड में फिलहाल इतना ही। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में लिमटी की लालटेन अब हर रोज सुबह 07 बजे प्रसारित की जा रही है। आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की वेब साईट या साई न्यूज के चेनल पर जाकर इसे रोजाना सुबह 07 बजे देख सकते हैं। अगर आपको लिमटी की लालटेन पसंद आ रही हो तो आप इसे लाईक, शेयर व सब्सक्राईब अवश्य करें। हम लिमटी की लालटेन का 760वां एपीसोड लेकर जल्द हाजिर होंगे, तब तक के लिए इजाजत दीजिए . . .
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