01 दिसंबर से पेंच नेशनल पार्क सहित सभी नेशनल पार्क व टाईगर रिजर्व में यह होगा पूरी तरह प्रतिबंधित . . .
पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन ने नहीं तोड़ी चुप्पी, स्थानीय लोगों के साथ हो रहा दोयम दर्जे का व्यवहार . . .
पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन ने नहीं तोड़ी चुप्पी, स्थानीय लोगों के साथ हो रहा दोयम दर्जे का व्यवहार . . .
(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद देश भर के सभी नेशनल पार्क और टाईगर रिजर्व में एक बहुत बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। अब सभी जगहों पर नाईट सफारी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्यों के मुख्य वन्य प्राणाी संरक्षकों के आदेश के बाद भी मध्य प्रदेश में मोगली की कर्मभूमि समझे जाने वाले पेंच पार्क के प्रबंधन ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि देश के हृदय प्रदेश सहित देश भर के सभी टाइगर रिजर्व में अब रात के वक्त बाघ एवं अन्य वन्य जीवों के दीदार नहीं हो पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के बाद एक दिसंबर से पूरे राज्य में नाइट सफारी बंद हो जाएगी। पहले से बुकिंग कराने वाले पर्यटकों को उनका पूरा पैसा लौटाया जाएगा।
देशभर के नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में 01 दिसंबर 2025 से नाइट सफारी पूरी तरह बंद कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताज़ा आदेश में कहा है कि किसी भी नेशनल पार्क, टाइगर रिज़र्व या संरक्षित वन क्षेत्र में रात के समय पर्यटक गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहेंगी। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने सभी राज्यों को आदेश भेजकर नाइट सफारी के संचालन, बुकिंग और प्रचार-प्रसार को तत्काल प्रभाव से रोकने को कहा है।
यह आदेश केवल पेंच नेशनल पार्क या किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों, अभ्यारण्यों और टाइगर रिज़र्वों में लागू होगा।
प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में एक दिसंबर से नाइट सफारी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर के निर्देश के बाद लागू किया जा रहा है। जिन पर्यटकों ने पहले से एडवांस बुकिंग कर रखी थी, उन्हें पूरी राशि लौटाई जाएगी।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय की पिटीशन देखने के लिए क्लिक कीजिए . . .
https://api.sci.gov.in/supremecourt/1995/2997/2997_1995_1_1501_66003_Judgement_17-Nov-2025.pdf
फील्ड डायरेक्टर्स को जारी किए आदेश
उधर, देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के हवाले से बताया कि पीसीसीएफ वाईल्ड लाईफ शुभरंजन सेन ने सभी रिजर्व के क्षेत्र संचालकों (फील्ड डायरेक्टर्स) को तत्काल आदेश जारी किए हैं। पेंच नेशनल पार्क सहित हर जगह रात्रिकालीन सफारी रोकी जाएगी।
कोर्ट का यह फैसला वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बचाने के लिए लिया गया है। नाइट सफारी से जानवर परेशान होते हैं, इसलिए अब सिर्फ दिन की सफारी चलेगी।
यह कदम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की आपत्ति के बाद आया है। पीसीसीएफ जेएस चौहान ने पहले ही पत्र लिखकर बंदी के निर्देश दे चुके हैं। पर्यटकों को निराशा तो होगी, लेकिन जानवरों का फायदा होगा। राज्य में कान्हा, बांधवगढ़ जैसे रिजर्व प्रभावित होंगे। प्रशासन ने रिफंड प्रक्रिया तेज करने को कहा है, ताकि किसी को परेशानी न हो।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब बफर क्षेत्रों में भी रात के समय प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जो पर्यटक नाइट सफारी के लिए पहले ही भुगतान कर चुके हैं, उन्हें रिफंड किया जाएगा। नाइट सफारी आमतौर पर शाम 6 बजे शुरू होती थी, लेकिन अब केवल दिन में प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। यह कदम वन्य जीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार में मानव हस्तक्षेप रोकने के लिए उठाया गया है। रात के समय वाहनों की आवाज़ और रोशनी से जानवरों के प्राकृतिक जीवन पर असर पड़ रहा था।
पेंच नेशनल पार्क का अपना कानून . . .
इधर, मोगली की कर्मभूमि पेंच नेशनल पार्क में स्थानीय निवासियों की खुली उपेक्षा की बात भी सामने आ रही है। पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एक बार जिसकी तैनाती पेंच नेशनल पार्क में हो जाती है वह यहां सिर्फ अपनी रेंज बदलता है, यहां से वह अधिकारी जाना नहीं चाहता।
सूत्रों का यह कहना भी था कि चूंकि सारे अधिकार अघोषित तौर पर पेंच नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद जे के बजाए क्षेत्र उप संचालक भारतीय वन सेवा के अधिकारी रजनीश कुमार के पास (कारण चाहे जो भी हो) हैं, जिसके चलते कर्मचारी बहुत ही असहज महसूस करते नजर आते हैं।
सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिए कि चूंकि कभी सिवनी में पेंच नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक रहे वर्तमान में वन्यजीव के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन के द्वारा निर्देश क्षेत्र संचालकों को जारी किए गए हैं, और शनिवार रविवार सप्ताहांत होने के कारण क्षेत्र संचालक के द्वारा अथवा उनकी ईमेल आदि को उप संचालक के पास नहीं पहुंच पाने के चलते इस तरह के न तो निर्देश ही जारी हो सके हैं और न ही इस आशय की कोई सूचना भी मीडिया के जरिए प्रसारित की गई है, जिससे सोमवार 01 दिसंबर को नाईट सफारी के लिए आने वाले पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
नाइट सफारी आखिर क्यों बंद की गई? — जानिए कोर्ट के बड़े कारणसुप्रीम कोर्ट ने नाइट सफारी रोकने के पीछे कई गंभीर कारण बताए, जिनमें सबसे मुख्य हैं:
1. अंधेरे में वन्यजीवों का प्राकृतिक व्यवहार बाधित होता है
रात का समय अधिकतर जंगली जानवरों—विशेष रूप से बाघ, तेंदुआ, भालू, लोमड़ी और सरीसृपों—की सक्रियता का होता है।
मनुष्य की:
गाड़ियों की हेडलाइट
टॉर्च लाइट
आवाज़
इंजन की ध्वनि
इनसे जानवरों का नेचुरल लाइफ-साइकिल प्रभावित होती है। कोर्ट ने कहा कि यह "संवेदनशील प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा" है।
2. बाघों पर मनोवैज्ञानिक दबाव (Stress Impact)
बाघ मुख्यतः रात में शिकार करते हैं।
मानव गतिविधि से:
बाघ भोजन तलाशने में असमर्थ हो जाते हैं
अपने क्षेत्र से दूर चले जाते हैं
कई बार हताश होकर मानव बस्तियों की ओर बढ़ जाते हैं
NTCA ने कोर्ट को बताया कि नाइट सफारी से “टाइगर डिस्प्लेसमेंट” यानी बाघों का अपने प्राकृतिक क्षेत्र को छोड़ना तेजी से बढ़ गया है।
3. अंधेरे में दुर्घटना का खतरा बहुत बढ़ जाता है
जंगल के कच्चे रास्तों पर रात में:
वाहन फिसलने
जंगली जानवरों से अचानक टकराने
पर्यटकों के फंसने
का खतरा अधिक होता है।
कई राज्यों ने कोर्ट में रिपोर्ट दी कि बीते वर्षों में नाइट सफारी के दौरान कई दुर्घटनाएँ हुईं।
4. जंगल का “रात का शांत समय” तोड़ना अवैज्ञानिक है
वन्यजीव सुरक्षा नियमों और भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) के अनुसार, जंगल रात में मानव हस्तक्षेप से मुक्त रहने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
“जंगल का प्राकृतिक मौन और अंधेरा ही वन्यजीवों को सुरक्षित रखता है, इसलिए रात में कोई भी पर्यटन वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं।”
5. अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है
रात में सफारी शुरू होने के बाद कई राज्यों में:
अवैध रास्तों से घुसपैठ
शिकारियों की गतिविधियाँ
लकड़ी तस्करी
अवैध शराब परिवहन
जैसी शिकायतें बढ़ीं।
कोर्ट ने कहा कि नाइट सफारी "कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव" डालती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला — मुख्य बिंदुसुप्रीम कोर्ट ने “In Re: Corbett Tiger Reserve Case” में निम्नलिखित आदेश दिए:
1. देशभर के सभी संरक्षित क्षेत्रों में नाइट सफारी तुरंत बंद की जाए।
किसी भी पार्क में सूर्यास्त के बाद पर्यटक वाहन प्रवेश नहीं करेगा।
2. रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध।
12 घंटे का नो-एंट्री ज़ोन अनिवार्य होगा।
3. किसी भी राज्य को नाइट टूरिज्म की अनुमति देने का अधिकार नहीं।
राज्य सरकारें पहले स्थानीय स्तर पर यह अनुमति दे देती थीं।
अब यह अधिकार भी खत्म।
4. वन्यजीव सुरक्षा पहले, पर्यटन बाद में।
कोर्ट ने कहा कि कमाई या पर्यटन को बढ़ावा देना प्राथमिकता नहीं हो सकता।
राज्यों पर क्या असर?1. मध्य प्रदेश – पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ में नाइट सफारी बंद
एमपी पर्यटन विभाग ने 01 दिसंबर से सभी नाइट सफारी रद्द कर दीं।
पेंच और कान्हा में यह सबसे लोकप्रिय गतिविधि थी।
2. महाराष्ट्र – ताड़ोबा में कड़ी बंदिशें
ताड़ोबा में वर्षों से चल रही नाइट सफारी पर पूर्ण रोक लगा दी गई।
3. उत्तराखंड – कॉर्बेट में विशेष निगरानी
यह आदेश कॉर्बेट केस में आया था, इसलिए यहां निगरानी सबसे सख्त है।
स्थानीय लोगों और रिसॉर्ट व्यवसाय पर प्रभाव
1. पर्यटन कम होगा, होटल बुकिंग घटेगी
नाइट सफारी एक आकर्षण थी—इसके बंद होने से कई रिसॉर्ट शिफ्ट योजना पर काम कर रहे हैं।
2. गाइड व ड्राइवरों की आय प्रभावित
कई गाइड प्रतिदिन 2–3 नाइट सफारी से कमाई करते थे।
अब वे केवल डे सफारी पर निर्भर रहेंगे।
3. स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत जरूरी
कई गांवों के लोग कहते हैं कि विभाग ने उनकी राय लिए बिना ही निर्णय लागू कर दिया।
क्या दिन की सफारी पर असर पड़ेगा?
नहीं।
कोर्ट ने दिन में सफारी, कोर-ज़ोन विज़िट, बफर-ज़ोन विज़िट, बर्ड-वॉचिंग, नेचर-वॉक जैसी गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगाई है।
केवल रात का प्रवेश प्रतिबंधित है।
क्या भविष्य में नाइट सफारी दोबारा शुरू हो सकती है?
फिलहाल संभावना बेहद कम है, क्योंकि:
कोर्ट ने इसे “वैज्ञानिक रूप से गलत” कहा है
NTCA ने इसे “प्रजातियों के लिए हानिकारक” माना है
पर्यावरण मंत्रालय ने भी सहमति दी है
जब तक कोई नई वैज्ञानिक रिपोर्ट न आए, प्रतिबंध समाप्त होना मुश्किल है।
Conclusion (निष्कर्ष)
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भले पर्यटन पर असर डालता हो, लेकिन वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला है।
रात का समय जंगल का प्राकृतिक समय है, और मानव गतिविधि से दूर रहकर ही वन्यजीव सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं।
01 दिसंबर से शुरू हुआ यह प्रतिबंध आने वाले समय में भारत के वन्यजीव संरक्षण मॉडल को और मजबूत बनाएगा।
नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी (Night Safari) इसलिए बंद की गई है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि रात में पर्यटन वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनता है और जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ता है।
नीचे पूरी वजहें विस्तार से समझिए:
नाइट सफारी क्यों बंद की गई? — मुख्य कारण
रात में वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधि प्रभावित होती है
रात का समय जंगल में लगभग सभी जानवरों—बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, सियार, नीलगाय आदि—का सबसे सक्रिय समय होता है।
वाहनों की रोशनी, कैमरे, आवाज़ और गाड़ियों की हलचल से जानवर:
शिकार नहीं कर पाते
आराम में बाधा आती है
तनाव (Stress) बढ़ता है
उनके प्राकृतिक व्यवहार में बदलाव आने लगता है
तेज़ रोशनी और गाड़ियों के कारण दुर्घटना का खतरा
अंधेरा होने पर:
जानवर अचानक सड़क पर आ जाते हैं
गाड़ी और जानवर दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है
पहले कई जगह वाहन–वन्यजीव टकराव के मामले बढ़े हैं
इसलिए कोर्ट ने इसे “Avoidable Hazard” कहा।
शावक (Cubs) और संवेदनशील प्रजातियों पर गंभीर प्रभाव
बाघिनें रात में अपने बच्चों को लेकर घूमती हैं, शिकार लाती हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
नाइट सफारी के कारण:
बाघिन अपनी गतिविधि बदलने लगती है
शावकों को भोजन मिलने में दिक्कत
कई बार वे बड़ी पटरियों से दूर हट जाती हैं
यह उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है
शिकारियों को (Poachers) को गतिविधि का फायदा मिल सकता है
कोर्ट की प्रमुख चिंता यह भी है कि:
रात में आवाजाही बढ़ने से
जंगल में जाने की आड़ में
शिकार और अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है
इसलिए पूरी तरह प्रतिबंध आवश्यक माना गया।
जंगल का प्राकृतिक “नाइट साइकल” (Night Cycle) बिगड़ता है
जंगल का अपना प्राकृतिक 24 घंटे का चक्र होता है। कृत्रिम रोशनी और आवाज़ें:
रात के पेड़ों–पौधों के रासायनिक चक्र
निशाचर पक्षियों
कीट-पतंगों
छोटे जीवों
को भारी नुकसान पहुँचाती हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन व NGT की पिछली रिपोर्ट का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक रिपोर्ट्स को आधार बनाकर कहा:
Night Disturbance = Wildlife Stress
Light Pollution = Habitat Disruption
Continuous Tourism = Breeding Cycle Impact
इसलिए “Night Tourism” को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य आदेश (Easy Summary)
कोर एरिया (Core area) में ANY safari = पूरी तरह प्रतिबंध
बफर एरिया (Buffer zone) में भी Night Safari = पूरी तरह बंद
Safari केवल दिन में और सीमित संख्या में ही हो
Tiger Reserve = Not for commercial entertainment
Forest is for Wildlife, not tourism
कौन-कौन से रिज़र्व में नाइट सफारी बंद हुई?
मध्य प्रदेश में सभी 9 टाइगर रिज़र्व सहित पूरा भारत:
कान्हा (Kanha)
पेंच (Pench)
बांधवगढ़ (Bandhavgarh)
पन्ना (Panna)
सतपुड़ा (Satpura)
संजय दुबरी (Sanjay Dubri)
नौरादेही
ओरछा
राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
अभयारण्य (Sanctuaries)
सभी जगह रात की सफारी बंद है।
--
पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन ने नहीं तोड़ी चुप्पी, स्थानीय लोगों के साथ हो रहा दोयम दर्जे का व्यवहार . . .
पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन ने नहीं तोड़ी चुप्पी, स्थानीय लोगों के साथ हो रहा दोयम दर्जे का व्यवहार . . .
(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद देश भर के सभी नेशनल पार्क और टाईगर रिजर्व में एक बहुत बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। अब सभी जगहों पर नाईट सफारी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्यों के मुख्य वन्य प्राणाी संरक्षकों के आदेश के बाद भी मध्य प्रदेश में मोगली की कर्मभूमि समझे जाने वाले पेंच पार्क के प्रबंधन ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि देश के हृदय प्रदेश सहित देश भर के सभी टाइगर रिजर्व में अब रात के वक्त बाघ एवं अन्य वन्य जीवों के दीदार नहीं हो पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के बाद एक दिसंबर से पूरे राज्य में नाइट सफारी बंद हो जाएगी। पहले से बुकिंग कराने वाले पर्यटकों को उनका पूरा पैसा लौटाया जाएगा।
देशभर के नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में 01 दिसंबर 2025 से नाइट सफारी पूरी तरह बंद कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताज़ा आदेश में कहा है कि किसी भी नेशनल पार्क, टाइगर रिज़र्व या संरक्षित वन क्षेत्र में रात के समय पर्यटक गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहेंगी। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने सभी राज्यों को आदेश भेजकर नाइट सफारी के संचालन, बुकिंग और प्रचार-प्रसार को तत्काल प्रभाव से रोकने को कहा है।
यह आदेश केवल पेंच नेशनल पार्क या किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों, अभ्यारण्यों और टाइगर रिज़र्वों में लागू होगा।
प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में एक दिसंबर से नाइट सफारी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर के निर्देश के बाद लागू किया जा रहा है। जिन पर्यटकों ने पहले से एडवांस बुकिंग कर रखी थी, उन्हें पूरी राशि लौटाई जाएगी।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय की पिटीशन देखने के लिए क्लिक कीजिए . . .
https://api.sci.gov.in/
फील्ड डायरेक्टर्स को जारी किए आदेश
उधर, देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के हवाले से बताया कि पीसीसीएफ वाईल्ड लाईफ शुभरंजन सेन ने सभी रिजर्व के क्षेत्र संचालकों (फील्ड डायरेक्टर्स) को तत्काल आदेश जारी किए हैं। पेंच नेशनल पार्क सहित हर जगह रात्रिकालीन सफारी रोकी जाएगी।
कोर्ट का यह फैसला वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बचाने के लिए लिया गया है। नाइट सफारी से जानवर परेशान होते हैं, इसलिए अब सिर्फ दिन की सफारी चलेगी।
यह कदम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की आपत्ति के बाद आया है। पीसीसीएफ जेएस चौहान ने पहले ही पत्र लिखकर बंदी के निर्देश दे चुके हैं। पर्यटकों को निराशा तो होगी, लेकिन जानवरों का फायदा होगा। राज्य में कान्हा, बांधवगढ़ जैसे रिजर्व प्रभावित होंगे। प्रशासन ने रिफंड प्रक्रिया तेज करने को कहा है, ताकि किसी को परेशानी न हो।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब बफर क्षेत्रों में भी रात के समय प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जो पर्यटक नाइट सफारी के लिए पहले ही भुगतान कर चुके हैं, उन्हें रिफंड किया जाएगा। नाइट सफारी आमतौर पर शाम 6 बजे शुरू होती थी, लेकिन अब केवल दिन में प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। यह कदम वन्य जीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार में मानव हस्तक्षेप रोकने के लिए उठाया गया है। रात के समय वाहनों की आवाज़ और रोशनी से जानवरों के प्राकृतिक जीवन पर असर पड़ रहा था।
पेंच नेशनल पार्क का अपना कानून . . .
इधर, मोगली की कर्मभूमि पेंच नेशनल पार्क में स्थानीय निवासियों की खुली उपेक्षा की बात भी सामने आ रही है। पेंच नेशनल पार्क प्रबंधन के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एक बार जिसकी तैनाती पेंच नेशनल पार्क में हो जाती है वह यहां सिर्फ अपनी रेंज बदलता है, यहां से वह अधिकारी जाना नहीं चाहता।
सूत्रों का यह कहना भी था कि चूंकि सारे अधिकार अघोषित तौर पर पेंच नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद जे के बजाए क्षेत्र उप संचालक भारतीय वन सेवा के अधिकारी रजनीश कुमार के पास (कारण चाहे जो भी हो) हैं, जिसके चलते कर्मचारी बहुत ही असहज महसूस करते नजर आते हैं।
सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिए कि चूंकि कभी सिवनी में पेंच नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक रहे वर्तमान में वन्यजीव के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन के द्वारा निर्देश क्षेत्र संचालकों को जारी किए गए हैं, और शनिवार रविवार सप्ताहांत होने के कारण क्षेत्र संचालक के द्वारा अथवा उनकी ईमेल आदि को उप संचालक के पास नहीं पहुंच पाने के चलते इस तरह के न तो निर्देश ही जारी हो सके हैं और न ही इस आशय की कोई सूचना भी मीडिया के जरिए प्रसारित की गई है, जिससे सोमवार 01 दिसंबर को नाईट सफारी के लिए आने वाले पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
नाइट सफारी आखिर क्यों बंद की गई? — जानिए कोर्ट के बड़े कारणसुप्रीम कोर्ट ने नाइट सफारी रोकने के पीछे कई गंभीर कारण बताए, जिनमें सबसे मुख्य हैं:1. अंधेरे में वन्यजीवों का प्राकृतिक व्यवहार बाधित होता है
रात का समय अधिकतर जंगली जानवरों—विशेष रूप से बाघ, तेंदुआ, भालू, लोमड़ी और सरीसृपों—की सक्रियता का होता है।
मनुष्य की:
गाड़ियों की हेडलाइट
टॉर्च लाइट
आवाज़
इंजन की ध्वनि
इनसे जानवरों का नेचुरल लाइफ-साइकिल प्रभावित होती है। कोर्ट ने कहा कि यह "संवेदनशील प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा" है।
2. बाघों पर मनोवैज्ञानिक दबाव (Stress Impact)
बाघ मुख्यतः रात में शिकार करते हैं।
मानव गतिविधि से:
बाघ भोजन तलाशने में असमर्थ हो जाते हैं
अपने क्षेत्र से दूर चले जाते हैं
कई बार हताश होकर मानव बस्तियों की ओर बढ़ जाते हैं
NTCA ने कोर्ट को बताया कि नाइट सफारी से “टाइगर डिस्प्लेसमेंट” यानी बाघों का अपने प्राकृतिक क्षेत्र को छोड़ना तेजी से बढ़ गया है।
3. अंधेरे में दुर्घटना का खतरा बहुत बढ़ जाता है
जंगल के कच्चे रास्तों पर रात में:
वाहन फिसलने
जंगली जानवरों से अचानक टकराने
पर्यटकों के फंसने
का खतरा अधिक होता है।
कई राज्यों ने कोर्ट में रिपोर्ट दी कि बीते वर्षों में नाइट सफारी के दौरान कई दुर्घटनाएँ हुईं।
4. जंगल का “रात का शांत समय” तोड़ना अवैज्ञानिक है
वन्यजीव सुरक्षा नियमों और भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) के अनुसार, जंगल रात में मानव हस्तक्षेप से मुक्त रहने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
“जंगल का प्राकृतिक मौन और अंधेरा ही वन्यजीवों को सुरक्षित रखता है, इसलिए रात में कोई भी पर्यटन वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं।”
5. अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है
रात में सफारी शुरू होने के बाद कई राज्यों में:
अवैध रास्तों से घुसपैठ
शिकारियों की गतिविधियाँ
लकड़ी तस्करी
अवैध शराब परिवहन
जैसी शिकायतें बढ़ीं।
कोर्ट ने कहा कि नाइट सफारी "कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव" डालती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला — मुख्य बिंदुसुप्रीम कोर्ट ने “In Re: Corbett Tiger Reserve Case” में निम्नलिखित आदेश दिए:1. देशभर के सभी संरक्षित क्षेत्रों में नाइट सफारी तुरंत बंद की जाए।
किसी भी पार्क में सूर्यास्त के बाद पर्यटक वाहन प्रवेश नहीं करेगा।
2. रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध।
12 घंटे का नो-एंट्री ज़ोन अनिवार्य होगा।
3. किसी भी राज्य को नाइट टूरिज्म की अनुमति देने का अधिकार नहीं।
राज्य सरकारें पहले स्थानीय स्तर पर यह अनुमति दे देती थीं।
अब यह अधिकार भी खत्म।
4. वन्यजीव सुरक्षा पहले, पर्यटन बाद में।
कोर्ट ने कहा कि कमाई या पर्यटन को बढ़ावा देना प्राथमिकता नहीं हो सकता।
राज्यों पर क्या असर?1. मध्य प्रदेश – पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ में नाइट सफारी बंदएमपी पर्यटन विभाग ने 01 दिसंबर से सभी नाइट सफारी रद्द कर दीं।
पेंच और कान्हा में यह सबसे लोकप्रिय गतिविधि थी।
2. महाराष्ट्र – ताड़ोबा में कड़ी बंदिशें
ताड़ोबा में वर्षों से चल रही नाइट सफारी पर पूर्ण रोक लगा दी गई।
3. उत्तराखंड – कॉर्बेट में विशेष निगरानी
यह आदेश कॉर्बेट केस में आया था, इसलिए यहां निगरानी सबसे सख्त है।
1. पर्यटन कम होगा, होटल बुकिंग घटेगी
नाइट सफारी एक आकर्षण थी—इसके बंद होने से कई रिसॉर्ट शिफ्ट योजना पर काम कर रहे हैं।
2. गाइड व ड्राइवरों की आय प्रभावित
कई गाइड प्रतिदिन 2–3 नाइट सफारी से कमाई करते थे।
अब वे केवल डे सफारी पर निर्भर रहेंगे।
3. स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत जरूरी
कई गांवों के लोग कहते हैं कि विभाग ने उनकी राय लिए बिना ही निर्णय लागू कर दिया।
नहीं।
कोर्ट ने दिन में सफारी, कोर-ज़ोन विज़िट, बफर-ज़ोन विज़िट, बर्ड-वॉचिंग, नेचर-वॉक जैसी गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगाई है।
केवल रात का प्रवेश प्रतिबंधित है।
फिलहाल संभावना बेहद कम है, क्योंकि:
कोर्ट ने इसे “वैज्ञानिक रूप से गलत” कहा है
NTCA ने इसे “प्रजातियों के लिए हानिकारक” माना है
पर्यावरण मंत्रालय ने भी सहमति दी है
जब तक कोई नई वैज्ञानिक रिपोर्ट न आए, प्रतिबंध समाप्त होना मुश्किल है।
Conclusion (निष्कर्ष)
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भले पर्यटन पर असर डालता हो, लेकिन वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला है।
रात का समय जंगल का प्राकृतिक समय है, और मानव गतिविधि से दूर रहकर ही वन्यजीव सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं।
01 दिसंबर से शुरू हुआ यह प्रतिबंध आने वाले समय में भारत के वन्यजीव संरक्षण मॉडल को और मजबूत बनाएगा।
नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी (Night Safari) इसलिए बंद की गई है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि रात में पर्यटन वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनता है और जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ता है।
नीचे पूरी वजहें विस्तार से समझिए:
रात में वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधि प्रभावित होती है
रात का समय जंगल में लगभग सभी जानवरों—बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, सियार, नीलगाय आदि—का सबसे सक्रिय समय होता है।
वाहनों की रोशनी, कैमरे, आवाज़ और गाड़ियों की हलचल से जानवर:
शिकार नहीं कर पाते
आराम में बाधा आती है
तनाव (Stress) बढ़ता है
उनके प्राकृतिक व्यवहार में बदलाव आने लगता है
तेज़ रोशनी और गाड़ियों के कारण दुर्घटना का खतरा
अंधेरा होने पर:
जानवर अचानक सड़क पर आ जाते हैं
गाड़ी और जानवर दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है
पहले कई जगह वाहन–वन्यजीव टकराव के मामले बढ़े हैं
इसलिए कोर्ट ने इसे “Avoidable Hazard” कहा।
शावक (Cubs) और संवेदनशील प्रजातियों पर गंभीर प्रभाव
बाघिनें रात में अपने बच्चों को लेकर घूमती हैं, शिकार लाती हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
नाइट सफारी के कारण:
बाघिन अपनी गतिविधि बदलने लगती है
शावकों को भोजन मिलने में दिक्कत
कई बार वे बड़ी पटरियों से दूर हट जाती हैं
यह उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है
शिकारियों को (Poachers) को गतिविधि का फायदा मिल सकता है
कोर्ट की प्रमुख चिंता यह भी है कि:
रात में आवाजाही बढ़ने से
जंगल में जाने की आड़ में
शिकार और अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है
इसलिए पूरी तरह प्रतिबंध आवश्यक माना गया।
जंगल का प्राकृतिक “नाइट साइकल” (Night Cycle) बिगड़ता है
जंगल का अपना प्राकृतिक 24 घंटे का चक्र होता है। कृत्रिम रोशनी और आवाज़ें:
रात के पेड़ों–पौधों के रासायनिक चक्र
निशाचर पक्षियों
कीट-पतंगों
छोटे जीवों
को भारी नुकसान पहुँचाती हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन व NGT की पिछली रिपोर्ट का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक रिपोर्ट्स को आधार बनाकर कहा:
Night Disturbance = Wildlife Stress
Light Pollution = Habitat Disruption
Continuous Tourism = Breeding Cycle Impact
इसलिए “Night Tourism” को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया।
कोर एरिया (Core area) में ANY safari = पूरी तरह प्रतिबंध
बफर एरिया (Buffer zone) में भी Night Safari = पूरी तरह बंद
Safari केवल दिन में और सीमित संख्या में ही हो
Tiger Reserve = Not for commercial entertainment
Forest is for Wildlife, not tourism
मध्य प्रदेश में सभी 9 टाइगर रिज़र्व सहित पूरा भारत:
कान्हा (Kanha)
पेंच (Pench)
बांधवगढ़ (Bandhavgarh)
पन्ना (Panna)
सतपुड़ा (Satpura)
संजय दुबरी (Sanjay Dubri)
नौरादेही
ओरछा
राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
अभयारण्य (Sanctuaries)
सभी जगह रात की सफारी बंद है।
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