Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मेरा है तू कहीं

 

 मेरा है तू कहीं -

अब तो नींद की ये रातें

 मुझे अपनी सी लगने लगी हैं,

 तेरे ही साये में ये जिंदगी सजने लगी है।

तेरा हसीन चेहरा -

तेरी वो प्यारी सी अदा, 

तेरे होठों की मुस्कान 

कोई दिलकश अदा लगने लगी है।

मेरी इन बंद आँखों के हर एक ख़्वाब में, 

बस तू ही तू बसता है इस रूह की किताब में।

दिल बस यही चाहता है -

 यूँ ही सोते ही चले जाएँ,

 इन हसीन -

ख़्वाबों की दुनिया में सिर्फ़ तुम्हारे हो जाएँ।

इस सुकून के पीछे 

एक अनजाना सा डर भी  है, 

हर पल ये दिल 

सहम कर बस यही कहता है—

अगर -

कभी ये प्यारी सी नींद जो टूट गई, 

तो सपनों की ये सारी दुनिया रूठ जाए ।

वो सपनों का महल -

सारा बिखर जाएगा,

 तू इन आँखों से कोसों दूर चला जाएगा।

बस इसी ख़ौफ़ से 

अब मुझे जागने से डर लगता है, 

सपनों की इस नगरी में 

ये दिल हर वक़्त मचलता है।

सच्चाई में तू मेरा न सही, 

तो इसका कोई ग़म नहीं,

 कम से कम -

इन सपनों की दुनिया में  सिर्फ़ मेरा है तू कहीं !


लता नायक

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