इंतजार है मुझे, मेरे प्यार का

बस एक आस लिए जी रही हूं
उसे हर सांस में महसूस करती हूं
न जाने ओ अजनबी कब मिलेगा
बस एक ख्वाब सजाये बैठी हूँ ।
उसकी एक कॉल आने के इंतज़ार में
न जाने कितनी बार मोबाईल घुमाती हूँ
कितनी बार उसे कॉल करती हूं ।
एक अनमोल ऐसा है जो उसके पास है
जिसे पाने की चाहत में तड़पती रहती हूँ
उसे हर कीमत पर पाने की लिप्सा में
दिन रात आस लगाए बैठी हूँ ।
वो चाहे किसी की नशा में डूबे
मैं तो उसी में डूब गई हूं,
बस, वो इतना भर कह दे –
“मैं तुमसे बेइंतहाँ मोहब्बत करता हूं”
उस दिन मुझे सारा जहां मिल जाएगा
एक भरोसा तो है – मुझे मेरे भगवान पर
आज नहीं तो कल – जरूर रखेंगे हाथ मेरे सर पर ।
लता नायक
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY