डॉ कृष्ण प्रकाश 'सुधांशु'
छुरी से ना कटे, ज़ुबान से कट जाएगा,
जो दिल में दर्द है, बयान से कट जाएगा।
आग से ना फटे, नज़र से फट जाएगा,
जो रिश्ता प्यार का है, गुमान से कट जाएगा।
बड़े सलीक़े से रिश्तों को तोड़ते हैं लोग,
कोई धागा नहीं, बस ज़ुबान से कट जाएगा।
हँसी के पीछे छुपा दर्द कौन पढ़ता है,
ये राज़ आँखों के हर निशान से कट जाएगा।
किसी के दिल में उतरकर तो देखिए साहब,
ग़ुरूर आपका इक इम्तिहान से कट जाएगा।
वो ज़ख़्म जिसको ज़माने से छुपा रखा है,
किसी के प्यार भरे इक बयान से कट जाएगा।
नफ़रतों की हवा में चराग़ क्या जलते,
ये दौर प्यार के एहसान से कट जाएगा।
‘सुधांशु’ लफ़्ज़ों में इतनी कड़वाहट न भरना,
कोई अपना भी तेरे मकान से कट जाएगा।
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