अंगना में आवऽ(मगही)
डॉ कृष्ण प्रकाश सुधांशु
चान्द मामू हम्मर अंगना में आवऽ,
जिनगी के आस लेके सपना देखावऽ।
सून्ना-सून्ना अंगना, सून्ना हम्मर दुआर,
तोहर जोतिया से चमके संसार।
ममता के नेहिया, अँखिया में सजावऽ,
चान्द मामू हम्मर अंगना में आवऽ।
फुलवा के बगिया में खुशबू बिखरावऽ,
सूखल जिनगी में हरियरपन लावऽ।
टूटल उम्मीद के फेर से जगावऽ,
जिनगी के आस लेके सपना देखावऽ।
माई के अँचरा में सुखवा समा जावऽ,
बाबू के माथे के चिंता मिटावऽ।
नन्हकी अँखिया में सपना सजावऽ,
जिनगी के पाठ सबके पढावऽ
हम्मर बाबू के दूध भात खिलावऽ
चान्द मामू हम्मर अंगना में आवऽ।
दुखवा के बदरिया दूर कहीं उड़ावऽ,
सुखवा के पुरवइया धीरे से बहावऽ।
हँसी-खुशी के नेहिया बरसावऽ,
जिनगी के आस लेके सपना देखावऽ।
चान्द मामू हम्मर अंगना में आवऽ,
जिनगी के आस लेके सपना दिखावऽ।
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