- वो वोट ले गये।
कुर्सी पे जाकर 'हलकू' जी 'हुजूर' हो गये।
किसमिस कभी थे और अब अंगूर हो गये।।
विश्वासघात देश की जनता से करके वो।
इतने हुए बदनाम कि मशहूर हो गये।।
लाशों पर कुर्सी डाल कर मंत्री भी हो गये।
खालों से खेल कर, वह निगाहें मगरूर हो गये।।
अपने शहर की गलियाँ-देखी नहीं कभी।
उनके विदेश तक के कई टूर हो गये।।
वादों के हलफनामों पर वो वोट ले गये।
फिर बन के मंत्री वह कहकसा 'नासूर' हो गये।।
कुर्सी रूपी सुन्दरी पाकर-सुरूर हो गये।
और जनता की नज़रों से एकदम दूर हो गये।।
ऐसे कितने विवेकी नारद-मोह में लंगूर हो गये।
इतने हुए बदनाम कि मशहूर हो गये।।
फूलों से भी 'दोस्ती' हो और काँटो से भी 'यारी' हो।
फिर कैसे मजे की प्यारी, ये 'जिन्दगी' हमारी हो।।
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