सूर्य भगवान
जो सूर्य उदय होने से प्रथम सूर्य नारायण को अर्ध्यदान करते हैं। सूर्य
नारायण बाहर आते हैं, तब वे हाथ जोड़ कर के खड़े रहते हैं। सूर्य
नारायण उनको प्रकाश देते हैं।
बहुत से लोग तो ऐसे भी होते हैं, जो सूर्य नारायण घर में आये तो भी
गादी नहीं छोड़ते हैं-पड़े रहते हैं। उनको ऐसा लगता है कि मैं तो बड़ा
साहब हूँ। मुझे कहने वाला, पूछने वाला कौन है? भगवान् कहते
हैं-'ऊपर आना, फिर तुम्हें बताता हूँ। मैने तुम्हें इस लिये साहब बनाया
था? बहुत मार पड़ेगी। सूर्य नारायण घर में आये हैं गादी में पड़ा है।
सूर्य नारायण प्रत्यक्ष परमात्मा हैं। उनका अनादर मत करो। सूर्य
नारायण सभी को प्रकाश समान रुप से देते हैं। परमात्मा की समता
सूर्य नारायण के प्रकाश के समान हैं। सभी को समान प्रकाश देते हैं।
सूर्य के प्रकाश में कोई पाप करता है, सूर्य के प्रकाश में कोई पुण्य
करता है। भगवान् प्रकाशमय है।
लोग कहते हैं-भगवान् कहाँ हैं? भगवान् का दर्शन नहीं होता है। सूर्य
नारायण ही भगवान, हैं। सूर्य नारायण बाहर आयें, तब हाथ जोड़ करके
खड़े रहो। सूर्य मण्डल में मेरे भगवान् विराजमान हैं-ऐैसी भावना करके
तेजोमय के साथ ध्यान करें। सूर्य नारायण बाहर आते हैं, तब उनकी
किरणों में ऐसी शक्ति होती है, जो अनेक रोगो के परमाणुओं को मारती
है। तन मन को शुद्ध करती है। मध्याह-काल में सूर्य नारायण का
दर्शन करो। प्रातः काल में सूर्य नारायण का जो दर्शन करता है,
सूर्योदय के समय में जो हाथ जोड़ करके सूर्य नारायण के सम्मुख
रहता है, उसके शरीर में जो रोग हैं, रोग के जो परमाणु हैं, उसका नाश
होता है। सूर्य नारायण आरोग्य देते हैं। मध्याह-काल में जो सूर्य
नारायण का बराबर दर्शन करता है, उसकी बुद्धि कभी बिगड़ती नहीं
है। बुद्धि के मालिक सूर्य नारायण हैं। मध्याह-काल में सूर्य नारायण
का दर्शन करो, सायंकाल में सूर्य नारायण का दर्शन करो।
आप ये 'लाइट' जलाते हैं-सरकार के यहाँ से बिल आयेगा, रुपया
भरना पड़ता है। आज तक सूर्य नारायण ने किसी के यहाँ 'बिल' भेजा
है-ऐसा सुना नहीं। सूर्य नारायण सभी को प्रकाश देते हैं। आप सूर्य के
ऋण में है। आप सूर्य को क्या देते हैं? सूर्य नारायण कभी अवकाश नहीं
लेते हैं। पंचांग में जो समय लिखा है, उसमें एक मिनट का भी फेर नहीं
होता-उसी समय सूर्य बाहर आते हैं। सूर्य नारायण आरोग्य देते हैं।
सूर्य की पूजा सभी के लिये आवश्यक है। सूर्य नारायण को अघ्यदान
करो। सूर्योदय से प्रथम स्नान करना चाहिये। सूर्य नारायण के सम्मुख
जो दन्त-धावन करता है, शौच-विधि करता है, वह सूर्य नारायण का
अपमान करता है। सूर्य नारायण उसको शाप देते हैं। सूर्य नारायण
प्रत्यक्ष परमात्मा हैं।
सूर्योदय से प्रथम स्नान करो। स्नान के तीन भेद शास्त्रों में बताये गये
हैं-ऋषि-स्नान, मानवी-स्नान और राक्षसी-स्नान। आकाश में तारा
का दर्शन हो-तब स्नान करके आसन में बैठ जाओ। संध्या करो,
गायत्री-जप करो, पूजा करो। आकाश में तारों का दर्शन होते जो
स्नान करता है-वह ऋषि-स्नान है। आकाश में कोई तारा का दर्शन
नहीं होता और सूर्य नारायण भी बाहर नहीं आयें-ऐसे समय में जों
स्नान किया जाता है, वह मानवी-स्नान है। सूर्य उदय होने के बाद जो
स्नान करता है, वह राक्षसी स्नान है।
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