संस्कारी बनो! तभी पैसा सुख ....
लाला बाबू के 5-6 शराब के ठेके थे, नेतागिरी चरम पर थी .. सांसद भी रहे ... । चार लड़कों में तीन शादी कर चुके थे। चौथे के सम्बन्ध आने लगे, दो करोड़ का भाव खोल दिया, इससे कम नहीं लूँगा। जायसवाल परिवार से थे, चार लड़के थे, संबन्ध काफी आये, अच्छे भी आये सब नकार दिये। इसी बीच कालीदीन चौरसिया के परिवार की इन पर नज़र पड़ी, उन्होंने लड़के से मिलना जुलना शुरू किया और अपने घर पर बुलाकर अपनी लड़की को दिखला दिया और घुमाना फिराना जाना शुरू किया, और यहाँ तक देर से आने पर घर पर ही सुला दिया।
परिवार के सब माफिया किस्म के थे और उनकी नज़र लाला बाबू की कमाई पर थी। लड़की ने लड़के को ऐसा वश में किया कि लड़के ने जिद पकड़ ली मैं शादी इसी से करूँगा। लड़कें की माँ ने समझाया और उसने विरोध किया, तो लड़के ने कहा-मैं कोर्ट मैरिज कर लूँगा। लाला बाबू ने विरोध कर लड़के को एक-दो थप्पड़ मार दिया, बात एकदम बिगड़ गई, उनको दो करोड़ रुपया दिख रहा था, फिर पता नहीं कैसे क्या हुआ, लाला बाबू को पीछे हटना पड़ा और कोर्ट मैरिज के बाद फिर सादे समारोह में शादी हो गई। लड़की संस्कारी नहीं है, यह बात लोगों से स्पष्ट हो गई थी, सारा परिवार शंकित था ही, बिदा आने के बाद सब ठीक था और वह परिवार के बारे में समझाती रही और एक दिन लड़के से बोली यहाँ नहीं रहेगी, मेरा दम घुट रहा है, और उसने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये। लड़की का पारिवारिक माहौल ठीक नहीं था।
लाला बाबू सन्नाटे में आ गये अपने दोस्त बंशीधर के घर गए सब बताया, भाई तुमने ही गलती की है, दो करोड़ का भाव खोल दिया मैंने ही तुम्हारे पास एक से एक अच्छे संस्कारी संबन्ध भेजे। इतना पैसा होने के बाद भी तुमने पैसा मांगे क्या तुमको किसी गरीब घराने की सुशील कन्या का उद्धार नहीं करना चाहिए था? समाज को बिगाड़ने वाले भी तुम सब हो, प्रकृति सब देखती रहती है। तुमने खुद ही अपना परिवार बिगाड़ा है। इतना पैसा साथ ले जाओ, खुद शराब पी, और उसने सब पर हाथ उठा लिया है, और मैके वालों के फोन आते हैं, लड़की को परेशान किया तो, सब को जेल भिजवा देंगें। प्रकृति ने जो भी किया ठीक ही किया है अब जो भी हो गया है सहुलियत से बात करो, मैं उनके मायके वाले से बात करके लेदेकर सुलहनामा लिखवा दूँगा .. निबटा दूंगा। तुम वकील से परामर्श करके नियमानुसार समाधान देखो! पता नहीं किस प्रकार से दो-तीन साल में तमाम परेशानियों को झेल कर तलाक, एक मोटी रकम देकर दस्तखत हुआ। बंशीधर बोले !- आगे तुम्हारे आगे तीन और लड़कियां है पैसे के आगे तुम्हें कुछ दिखाई नहीं दिया, फिर तुमने कौन सा अच्छा पैसा कमाया, नकली शराब और लाखों की बद्दुआ ली। परमात्मा ने तुमको आईना दिखा दिया है। बस लड़के का सुनहरा वक्त खत्म हो गया है, तुम्हें बहुत मिला ? इतनी दिमागी टेंशन जिल्लत और पैसे का छीन बट्टा, अब संभल जाओ मैं इसकी शादी दूसरी करवा सकता हूँ, लड़की गरीब घर की संस्कारी मेरे यहाँ आती है, बेटी की तरह से प्यार करो, तुम्हारे पूरे परिवार में उजाला हो जायेगा।
पैसे के आगे दीन ईमान न बेचना, परमात्मा ने इतना दिया है फिर क्यों नीयत को खराब, तुम्हें कोई समझा ही नहीं सकता था, मगर प्रकृति ने एक झटके में तुमको सब दिखला दिया। कोई कर्म अच्छे थे कि लड़का जेल नहीं गया। सब पर दया दृष्टि रखने वाले सुखी रह सकते हैं। पैसे से सुख नहीं है। पैसा माध्यम है, संस्कारी कार्य करो तभी पैसा भी सुख देगा। ज्यादा पैसा भी सदा दुख ही देता है। मेरे देखो-मतलब ... । इस लड़के की दूसरी शादी सादे समारोह में करेंगे और भी 11 कन्याओं की शादी भव्य समारोह करके उनके माँ बाप का आशीर्वाद लेकर कार्य करो, सब ठीक हो जायेगा। थोड़ा दण्ड मिलता है, तभी आदमी को कुछ सही दिखाई पड़ता है। आंखें खुलती हैं, बुरा दिखाई पड़ता है। समाज में ऐसा न करो! कि प्रकृति को तुमसे बदला लेना पड़े। तुम चाहे जो भी नैतिक-अनैतिक कर लो प्रकृति तुमको छोड़ेगी नहीं। नज़र नीयत ठीक करो। पैसे कौड़ी को माँ लक्ष्मी जी का प्रसाद समझो-उन्हीं के आदेशानुसार खर्च करो, नहीं तो माँ लक्ष्मी रुष्ट हो जायेंगी- तुम कुछ कर नहीं पाओगे, किसी जन्म के पुण्य से धन आ गया था, इसको समाज को, देश के कल्याण में लगा दो- माँ लक्ष्मी जी को प्रसन्न रखो! कभी कुछ कमी नहीं रहेगी। सबका भला करोगे, तभी तुम्हारा भला होगा, परमात्मा से प्रार्थना करो।
थोड़ा हंस लें ... एक दुबले-पतले आदमी की पत्नी काफी मोटी और लम्बी थी। लिहाजा वह उदास रहा करता था। एक दिन उसके दोस्त ने उसे समझाते हुए कहा- देखो भाई, पति-पत्नी गृहस्थ रूपी गाड़ी के दो पहियों के समान हैं। इस पर उसके दोस्त ने - मानता हूँ तुम्हारी बात सही है, लेकिन जब एक पहिया ट्रेक्टर का हो और दूसरा स्कूटी का, तो बताओ गाड़ी कैसे चलेगी
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