Swargvibha
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हिन्दुस्तान की हड्डियाँ चूसते रहें ...

 

हिन्दुस्तान की हड्डियाँ चूसते रहें ...


लड़ाई पूरे शवाब पर चल रही थी, टी. वी. अखबार पूरे खबरों से भरे थे। एकाएक मेजर रोहन जी ने पता नहीं कैसे पिता की मृत्यु के श्राद्ध के लिये छुट्टी ली और सोचने लगा- अब वापस नहीं जाऊँगा। श्राद्ध करके अपनी पुरानी मित्र मंडली से मिला। मेजर की पोस्ट पर लम्बा चौड़ा और कद्दावर जवान सिर्फ 30 वर्ष का जवान था। बहोत ज्यादा परेशान होकर उसने अपने मित्र से कहा, मित्र भी ठीक-ठाक था और तमामो परेशानियों से घिरा कभी-कभी तंग गली-कमला बाई के यहां चल जाता था उसको भी साथ ले गया।

गुमसुम बैठा था। एकाएक उसने देखा-सामने दीवार पर तीन-चार मेल के शहीदों के कैलेन्डर लगे हैं दो चार शराब की बोतलें टेबिल पर रखी थी। एकाएक पर्दे के पीछे से, कमलाबाई के यहां रहने वाली "खुशबू" ने दस्तक दी। 24 साल की उम्र, सब तरफ से पूर्ण और सुन्दर थी। कहां से आये हैं-उसने पूछा? कुछ जवाब नहीं दिया तो बोली-परेशान ज्यादा हो क्यों?भारी सदमा हो गया है। लगता है फौज में हो।

हाँ। उसने बड़े अनमने से कहा। दिन-रात सरहद पर रहते-2 थक गया हूँ-मैं वापस नहीं जाऊंगा। तो यहाँ पर क्या सुकून मिलेगा? तिल-2 करके मरने से एक मुस्त शान से मरना ज्यादा अच्छा है। मेरे भी खानदान में एक दो लोग फौज में थे। गाना सुनोगे, मन बहल जायेगा, कुछ राहत मिल जायेगी -वह बोली! रास्ता मिल गया है यहीं पर शादी-ब्याह कर लेंगे और घर बसा लेंगे जरा हंस दिया। 

- वह सोचने लगा! उस जिन्दगी से ये बहुत अच्छी है। ठीक से बैठ गया। 'खूशबू' के जीवन में कई बार ऐसे वाकये आये थे वह भी हँस दी- बैठो आराम से इन्तजाम कर रही हूँ। चाय तो पियोगे। मेजर को लगा- जैसे किसी ने जलते हुए बदन पर ठंडा कपड़ा उड़ा दिया। उसने पांच सौ रूपये का है नोट निकाला और उसके आगे बढ़ाया। अरे! इससे क्या होगा? ले लूंगी, पहले गाना सुनो ठंडे हो जाओगे और एक कप चाय नाश्ता मंगवा दिया। सोचने लगी मैं तो पहले ही बरबाद हो चुकी हूं, अब यह 'बदन' किसी को बरबाद नहीं करेगा। ऊपर जाकर भी जवाब देना पड़ेगा। गुनाह ऐसा हो कि ऊपर वाला भी माफ कर सके।

नाच गाना सुनाया, नाम, पता, मो० नं० पूछा और समझ लिया-भटका हुआ मुसाफिर है कहीं किसी गलत हाथों में पड़ जायेगा तो देश का बहुत बड़ा नुकसान हो जायेगा। लड़ाई के फ्रन्ट पर लड़ाई में हार भी हो सकती है। सोचते-2 उसकी आंखें सजल हो गई। यह जघन्य गुनाह मैं नहीं कर सकती-पहले ही से जिन्दगी गुनाहों से भरी है। जिन्दगी में दाग ही दाग हैं। यहां तक कैसे आये?

इनके साथ आया बहुत परेशान था, घर में ज्यादा लोग है नहीं, सोचा शादी करके आराम से रहेंगे, तुम बहोत अच्छी ... । हां ठीक है! और देश का क्या होगा? तुमने छुट्टी किसी बहुत खास वजह से ली होगी। इस समय लड़ाई बहोत भयंकर चल रही है। सुना है, सरहद पर दिन रात गोलाबारी और आतंकी हमले हो रहे हैं और तुम ... अब जिनको लड़ना है लड़े, मुझसे न होगा, दिन रात इस तरह से गोला बारूद के बीच जिन्दगी को बरबाद, मैं तो यही रहूँ .. । एकाएक उसने गौर से देखा। जैसे उसने अपने हथियार डाल दिये हों। ये जवान अगर बैठ गया खराब हो गया तो देश का कितना बड़ा नुकसानहोगा-एकाएक उसकी आंखों से एक बूंद निकली, मैं तो पहले से ही बरबाद हूं और कितने को मैं बरबाद कर चुकी हूं, लोग शराब पीकर आते हैं, बीवी बच्चों के मुंह का कलेवा छीन कर पैसे छिड़क पर चले जाते हैं, घर जाकर बच्चों-बीवी को मारते हैं। पता नहीं मेरे इतने गुनाहों की कब कैसे भरपाई होगी।

इस समय चले जाओ। मेरी तबीयत कुछ खराब हो रही है। उसे चक्कर आने लगा। पसीने से बदल भीगने लगा। अगले दिन वह फिर आ गया, बहोत खुश था मानो उसको मंजिल मिल गई हो, दस्तक दी परदा हटा हुआ और एक दूसरी लड़की ने सोफे पर बैठा दिया। दोपहर का समय, सन्नाटा रहता ही है।

थोड़ी देर के बाद पूरे दुलहन के श्रृंगार के साथ 'खुशबू' ने दस्तक दी। साथ में आंखों से चिंगारियां निकल रही थीं। एकाएक उसकी तरफ लपक कर बोला-सत्तर हजार मिलता है, दोनों ऐैश करेंगे और एक झटके में उसको छूने की कोशिश की। खुशबू! एकाएक उसके गले से लिपट गई और रोने लगी।

एक मकान ले लेंगे, नौकरी छूट गई कोई काम कर लेंगे- फिर बोला। और इस देश का क्या होगा? सारे मेजर खराब हो जायेंगे, देश लड़ाई हार जायेगा, सोचते-२ उसकी आंखों से ज्वाला निकलने लगी। बोली। जिन्दगी भर हिन्दुस्तान की हड्रिडयाँ चूसते रहे और जब देश को जरूरत पड़ी मेरे पास आ गये। एक जोरदार चांटा मार कर थूक दिया। सोचने लगी- इसको बरबाद नहीं करूंगी- यह मेरा क्या करेगा? मुझे मार देगा या जो कुछ भी करेगा, इसको इसी समय सरहद पर वापस भेजना है, देश इसका इन्तजार कर रहा है। इस समय की यह मेरी देशभक्ती है।

रोहन सिंह विषधर सांप की तरह फुंफकारने लगा। जमींदोज कर दूँगा, एक फोन पर सारा अमला खत्म हो जायेगा। उसने सोफे का कपड़ा पकड़ा और वह फट गया। हत्था भी टेड़ा हो गया। फिर एकाएक आकर उसकी गोद में बैठ कर रोने लगी। आंखें पोंछने लगी। रोहन जी! मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ, तुमसे अच्छा मुझे और कौन मिलेगा मैं भी बहुत अच्छे खून से हूँ। समय ने मुझको यहाँ पर बैठाल दिया।

बात मान लो। कुछ दिनों की बात है। झंडा फहरा कर आ जाओ। मैंने तुम्हारे नाम से सिंदूर अलग कर दिया है और फिर आंखों से ज्वाला निकलने लगी- चले जाओ। बस! चले जाओ। अभी दफा हो जाओ दुबारा फिर माथा चूम लिश। रोहन सिंह चला गया। उसकी आंखों से ज्वालामुखी का लावा निकल रहा था। फ्रन्ट पर उसने इस तरह से तोपे घुमाई मानो-भयंकर तूफान आ गया हो और चार दिन बाद जब लड़ाई खत्म हुई और विजय पताका फहराई जा रही थी-उसकी एक टांग कम हो गई थी।

सरहद से खबरें आती थी और 'खुशबू' एकदम चौकन्नी थी, एक खबर से मालूम हुआ रोहन सिंह मिलेट्री कैम्प में एक टांग लिये लेटा है। सुहाग का जोड़ा पहने पता लगाती हुई 'खुशबू' अधिकारियों की खुशामत करती पहुंच गई। देखा ! वह कराह रहा था। तपाक से उसके सीने पर सर रख कर रोने लगी।

देखो! देखो !! मैं कितनी सुन्दर लग रही हूँ मैंने वही किया जो कहा था- तपाक से डिब्बी से निकाल कर चुटकी उसकी हाथ में दिया और उसका हाथ माथे पर जड़ दिया। सिंदूर माथे से लगा लिया वो उसकी आभा से पूरा मिलेट्री कैम्प चमक उठा। अधिकारी देखने लगे- ये क्या हो गया रोहन सिंह ने सारा दर्द-नुकसान भूलकर उसे छाती पर कस लिया। लोगों ने देखा-सारे अधिकारी खुशबे के इस अभूतपूर्व बलिदान पर अपनी-अपनी आंखों के आंसू पोछ रहे थे।

भयंकर हलचल अफरा-तफरी में रक्षा कैम्प में देशभक्ति के गीत ... ।दूसरे दिन अखबार में फोटो आई कि पूरा देश उस पर गर्व कर रहा है। ऐसी बालायें देश के ऊपर मर मिटने के लिये तैयार हो जायेंगी। भारत विश्व में सबसे ऊपर आ जायेगा। हम भी कुछ इस प्रकार की मिसाल पैदा करें।

एकाएक भारत माता की जय के नारों से मिलेट्री कैम्प गूंजने लगा। कुछ हलचल हुई, किसी ने मिलेट्री चीफ से कुछ कहा - एकाएक वह आ गये माहौल देखकर उन्होंने उसके सर पर हाथ रख दिया। तुम जो भी हो मुझे मालूम नहीं, मगर तुमने जो भी किया है मैं देख रहा हूँ। इनको दुबारा जीवन दान दिया है। तुम जीवन भर इनकी सेवा करना, सरकार सभी तरह से तुम दोनों को देखती रहेगी। एक मोर्चे पर इन्होंने तिरंगा फहराया है दूसरे मोर्चे पर तुमने इनके जीवन में तिरंगा फहरा दिया है, पूरे देश को तुम पर गर्व है, सदा सुखी रहो .... ।

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