इक मेरे चाहने से क्या होगा
इक मेरे चाहने से क्या होगा,
तुम भी तो हौसला दिखाओ कुछ।
राज मैंने तो हर उगल डाला,
प्यार अब तुम भी तो जताओ कुछ।
कुंडली मारकर न यूँ बैठो,
प्यार करते हो तो इजहार करो
डाल आँखों में आँख कुछ बोलो,
और ज्यादा न इंतजार करो।
जिंदगी कम है प्यार करने को,
रेत सा वक्त बहा जाता है।
तेरे होंठों पे यह लटका ताला,
अब नहीं और सहा जाता है।
मेरे जज्बात की इज्जत रख लो,
मेरी उम्मीद पर तरस खाओ।
मेरे उजड़े हुए गुलिस्ताँ में,
तुम घटा बन के, आ, बरस जाओ।
क्या पता फिर से ये वीरान चमन,
तेरे रहमो करम से बस जाए।
मेरी दुनिया का यह अकेलापन,
न मुझे काट काट कर खाए।।
-गौरव शुक्ल
मन्योरा
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