सावन गीत
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डॉ उषा श्रीवास्तव
बदरा उमर घुमड़ घन छाए
बिजुरी चमकन लागे न
नील गगन में काले बादल
जिया घबराए न।
झर -झर,झर -झर बुंदिया बरसे
मन मोरा घबराए
सावन मास सुहावन लागे
तुम्हारी याद सताए न ।
सुरमयि किरणें नभ से झांके
अनुपम छटा बिखेरे
शीतल मन्द पवन हिलकोरा
जिया हुलसाये न।
रात अंधेरी बादल गरजे
सावन शोर मचाएं
पपीहा पीहू -पीहू जब गाए
अंखियां बरसन लागे न।
मुजफ्फरपुर, बिहार
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