मां गंगा
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डॉ उषा श्रीवास्तव
हिमगिरि के उतुंग शिखर से
उतर के पुण्य घरा पर आई,
सत्य सनातन की धरती को
श्रद्धा -भक्ती का तीर्थ बनाईं।
सतयुग - त्रेता चाहे द्वापर
युगों-युगों से कलकल करतीं,
राम -कृष्ण की पावन भू पर
जगह-जगह मां पूजी पाईं।
भागीरथ की घोर तपस्या
भोले -नाथ के जटा समाईं,
हरिद्वार भूमि पर आकर
भारत भू को धन्य बनाईं।
प्रयाग राज में तीनों बहनें
गंगा-यमुना, सरस्वती मिलीं,
अमृत का जब बूंद पड़ा तब
कुंभ और महाकुंभ लगाईं ।
मुजफ्फरपुर, बिहार
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