अबकी सावन
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डॉ उषा श्रीवास्तव
अबकी सावन बहुत सुहावन
यादों की बरसात
मेरे आंगन में भी अवकी
बूंदों की बौछार
आई बूंदों की बौछार।
झिंगुर झन-झन गीत सुनाता
नाच रहा वन मोर
काले बादल गर्जन करते
बिजली करे अंजोर
आई बूंदों की बौछार।
कलियां घुंघट काढ़े बैठीं
लत्तीयां पांव पसार
भौरों के गुण-गुण गूंजों
बाग हुआ गुलज़ार
आई बूंदों की बौछार।
रात अंधेरी काले बादल
धडके जियरा मोर
प्यासी घरती तृप्त हुईं
ठंढी चले व्यार
आई बूंदों की बौछार।
मुजफ्फरपुर, बिहार
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