डॉ. उमेश महादोषी
आओ वैज्ञानिक
मुझ कवि के साथ मिलकर
काम करो
मैं दूंगा तुम्हें कुछ विचार/कुछ कल्पनाएं
तुम हथियार तैयार करो
बारूद और मारक रसायनों में
कुछ ऐसे न्यूक्लियर सुधार करो
कि तुम्हारे बनाए हथियार
पहचान सकें
सही को, गलत को
शान्ति के चाहक को
आतंक के वाहक को
उन हाथों को-
जिनमें होना चाहिए उन्हें
उन निशानों को-
जिन्हें भेदना चाहिए उन्हें
और उनमें कुछ ऐसे सुधार करो
कि वे अपनी इच्छा से चल सकें
उनकी इच्छा
सिर्फ और सिर्फ मानव सभ्यता की सुरक्षा हो
जिन्हें बचाना चाहिए
उन्हें वे बचा सकें
जिन्हें खत्म करना चाहिए
उन्हें वे खत्म कर सकें
वैज्ञानिक भाई!
यह काम पूरी सावधानी से करना
अपने मस्तिष्क और आंखों में
थोड़ा सा मेरा अंश रखना!
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