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साहित्य सम्राज्ञी : डॉ. तारा सिंह

 

साहित्य सम्राज्ञी  : डॉ. तारा सिंह

       - डॉ. त्रिलोक चंद फतेहपुरी



           हिंदी भाषा  वैश्विक स्तर पर निर्बाध गति से  अपना परचम लहरा रही है  । हिंदी विश्व की सबसे सरल , समृद्ध और वैज्ञानिक भाषा है  । दुनिया के हर कोने में हिंदी बोलने  व समझने वाले व्यक्ति अवश्य मिलेंगे  , बेशक वे हिंदी लिखना नहीं जानते हों । हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार  का श्रेय उन सभी ज्येष्ठ और श्रेष्ठ साहित्यकारों को जाता है जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से साहित्य लेखन  में अपना संपूर्ण जीवन खपा दिया  । उनके द्वारा रचा हिंदी साहित्य आज तक पाठकों की पहली पसंद रहा है । 

       उन्हीं उच्च कोटि के लेखकों में शामिल नवी मुंबई महाराष्ट्र की एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार जो छायावाद की एक प्रमुख स्तंभ रही हैं ,  उनका नाम है डॉ० तारा सिंह ।  आपने अपने उत्तम , अनुपम और श्रेष्ठ साहित्य  लेखन के द्वारा आधुनिक हिंदी साहित्य जगत को आलोकित किया है । आपकी गजलें , कविताएंँ और छंद आधुनिक हिंदी युग के साक्ष्य बने हैं  । इसलिए उन्हें युग प्रवर्तक साहित्यकार भी कहा जाता है  ।

डॉ० तारा सिंह कहानी और उपन्यास लेखन में भी सिद्धहस्त हैं  । उनके  साहित्य में पूर्व की आध्यात्मिक जीवन दृष्टि और पश्चिम की भौतिकवादी जीवन दृष्टि के मध्य संघर्ष जारी रहा है । उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से मानव मन का सूक्ष्म और भावनात्मक चित्रण किया है । उनके साहित्य में यथार्थ और आदर्श का मिश्रण मिलता है  । विशेष तौर से उनकी रचनाओं में प्रेम , घृणा , वात्सल्य , वीरता , संवेदनशीलता , नारी उत्पीड़न,  नारी सशक्तिकरण , राष्ट्रप्रेम आदि  विषय प्रमुख रहे हैं । आधुनिक हिंदी साहित्य के सर्वांगीण विकास में  उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है  । उनका दार्शनिक चिंतन नैतिक और व्यावहारिक स्तर पर दर्पण की भांति पारदर्शी रूप प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता रखता है । उनके 14 कहानी संग्रह , 22 काव्य संग्रह , 12 उपन्यास , तीन आलेख संग्रह ,  आठ गजल संग्रह , बाल- काव्य कुल मिलाकर 60 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं । प्रत्येक संग्रह समाज व पाठकों को एक नई राह व एक नई रोशनी दिखाने में सक्षम है । उनकी सभी पुस्तकें देश-विदेश के पुस्तकालयों में तथा अमेजॉन व  फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध हैं । कई पुस्तकें कू. कू. एफ एम पर भी उपलब्ध हैं  । उनकी अनेक कविताओं व  गजलों को फिल्मी गीत के तौर पर भी शामिल किया गया है ।  देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, पत्रकार सत्येंद्र कुमार पाठक द्वारा रचित पुस्तक " सम्मानित साहित्यकार" में " डाॅ. तारा सिंह एक असाधारण साहित्यिक यात्रा "  जीवन वृत्त  एवं  "राष्ट्र गीत " कविता संकलित है । 

                 डॉ० तारा सिंह की उच्च स्तरीय हिंदी साहित्य सेवा एवं विश्व व्यापक प्रचार के लिए उन्हें लगभग 260 सम्मानों ,  मानद उपाधियों और ट्रॉफियों द्वारा सम्मानित किया गया है। सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय लेखक अवार्ड,  विद्यासागर उपाधि , वर्ल्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड , राजीव गांधी एक्सीलेंस अवॉर्ड , मदर टेरेसा अवार्ड , सर्वश्रेष्ठ भारतीय नागरिक सम्मान , एशिया पेसिफिक इंटरनेशनल अवार्ड , भारत- नेपाल सद्भावना अवार्ड , वर्ल्ड ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड -2022 आदि सम्मान व पुरस्कार अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा उन्हें प्रदान किए गए हैं  ।

        डाॅ. तारा सिंह द्वारा स्थापित  " स्वर्गविभा " संस्था हिंदी प्रेमियों के लिए तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए " स्वर्ग विभा" त्रैमासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन करती रही है । " स्वर्ग विभा परिवार"  संस्था हिंदी साहित्य सेवा के आलोक में सराहनीय एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रबुद्ध साहित्यकारों को  " डाॅ. तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान" से सम्मानित करते हुए ट्राफी , मैडल और प्रशस्ति- पत्र  प्रदान करती रही है ।    

         समूचे विश्व में ख्याति व प्रशंसा पाने वाली तथा हिंदी भाषा का परचम फहराने वाली नवी मुंबई की परम विदुषी , साहित्य सम्राज्ञी , वात्सल्य और ममतामयी  लेखिका को मैं शत्-शत् नमन करता हूंँ । हिंदी साहित्य लेखन के द्वारा आपने सर्वोच्च मुकाम हासिल किया है  । अपनी साहित्य -साधना तथा हिंदी को परम अग्रता देने के नाते * डाॅ० तारा सिंह * हिंदी साहित्य संसार में सदा अमर रहेंगी ।


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