Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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अति सुंदर फूल निराले

 

फूल

 


अति   सुंदर  फूल    निराले

लाल   बैंगनी , हरे    गुलाबी

कुछ   नीले ,    कुछ    पीले

देखो कैसे डोल रहे मतवाले


सूरज   आकर   इन्हें   जगाता

स्वर्णजल    से  फिर  नहलाता

भँवरे     आते,   गान    सुनाते

तितलियाँ चूमतीं,हवा दुलराता


मंदिर   जाना    इसे   नहीं    पसंद

न  ही  प्रेमी  जोड़े  के, जयमाल में

गूँथकर      आता   इसे    आनंद

इसे   पसंद    है , धरती   माँ    के

चरणों में झड़-झड़कर मिट  जाना

जब       बहे,     प्रतिकूल     पवन

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