१५ अगस्त १९४७ को
आजादी मिली भारत को।
लाल फिरंगी लूटते रहे
दिन रात भारत को॥
सच में क्या है आजादी
इस गुलामगिरि से मुक्ति...?
जनता को नहीं मिली आजादी
नेताओं को मिली घोटाले की
दिन दहाडे देश को
लूटने बटोरने की आजादी॥
देश में सुव्यवस्था लाने को
देश में कानून बने।
राम राज्य का सपना था
साकार हुआ रावण का जुनून॥
वे तो विदेशी थे लूटते
पर अब क्या करे...?
अपने ही लूटते बटोरते
सच में क्या इन्हीं को मिली है आजादी
आजादी से देशद्रोही है मस्त
आजादी से नादान जनता है पस्त
वाह! क्या खाक मिली आजादी
न जाने कौन चाहता ऐसी बर्बादी॥
डॉ० सुनील कुमार परीट
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