ऋद्धांजलि
डाक्टर सुधा सिन्हा
एक महान युग का अंत हो गया,
वह तो सत अब अनन्त हो गया ,
कविताएं उसकी दिलों में बस गयीं ,
उसी से ही वह जीवंत हो गया।
बिहार गीत का है वही रचयिता ,
नभ में चमकती है इसकी यह पेटीका ,
नवगीत का वह बन गया सृजनकर्ता ,
साहित्य जगत उसके बिन बन गया है रीता।
ढूंढते हैं हम सभी सूनी हैं निगाहें ,
दूर वह चला गया छोड हमारी पनाहें ,
साहित्य जगत का था वह बडा दुलारा,
उसके जैसा ना कोई मिलेगा दुबारा।
नदियां कल कल कर बहती जातीं,
समुद्र में जाके बिलीन हो जातीं,
जीवन की धारा भी ऐसे चलती,
अनन्त में जा करके लीन हो जाती।
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