तुम्हारी याद
डाक्टर सुधा सिन्हा
नववर्ष की बेला आयी है,
प्रिय याद तुम्हारी आयी है।
कोयल भी कूक रही प्यारी ,
पपीहे से पी पी निकल रही,
गन्दे की क्यारी चहक रही,
बगिया भी सोनी महक रही।
यादों की बदरी छायी है।
प्रिय याद तुम्हारी आयी है।
भौंरे देखो भनभन करते,
तितली के पंखों से डरते,
कहीं लटक न जायें पंखों में ,
तेरी याद सुनहरी वे बुनते।
बहारों ने मस्ती पिरोयी है।
प्रिय याद तुम्हारी आयी है।
सरसो भी पीली खिली हुयी,
प्यारी सी धूप भी छनी हुयी,
हाथों में प्यार का नजराना,
मिलने को मन में ठनी हुयी।
इस बार मिलन की बारी है।
प्रिय याद तुम्हारी आयी है
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