वो सुकूने जिंदगी कहाँ से लाऊँ
जो तुमने थे कभी मुझको दिये
थकान पहुँच चुकी है कातिल तक
किस्मत ने हजारों इन्तिहा लिये
हसरतें रहती थीं जहाँ,वहाँ रहता है गम
बुझ गये खुशियों के सारे दिये
किस दिन न तोहमतें तमाशा किये
किस रोज न अश्रु दामन को गिले किये
रोती है दुनिया मेरी बदकिस्मती पर
कुछ लोग तो रो-रोके नाले बहा दिये
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