खुशबुएं जब बेवक्त आने लगे
समझो, ख़ुदा वाम जाने लगे
अब न चलेगी कोई तदबीरें
इलाज सारे बेअसर जाने लगे
मुद्दततलकजहान मेंहँसतेफ़िरे
अब रोने के दिन आने लगे
ऐसे, किसी राह से मैं वाकिफ़ नहीं
रहनुमा जिधर चाहे ले जाने लगे
आँखों के पानी में दीदा-ए-तर
मिस्ले- हुबाब से डूब जाने लगे
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