उस बेवफ़ा को गले से लगाकर देख लिया
होते हैं गुलाब में काँटे,आज़माकर देख लिया
दिल में और कोई आरजू बाकी बची नहीं
तारे को जमीं पर, सजाकर देख लिया
हुस्न पाबन्दे-रह-ओं-रस्मों बफ़ा होता नहीं,क्यों
मश-अले जां को जलाकर देख लिया
उम्र भर न दामाने- यार का हाथ आया
आरिजे-रोशन पर,अंजुम निसार कर देख लिया
दुश्मनी मुझसे थी, दिल से दिली रखने में
हर्ज़ क्या था, यार को समझाकर देख लिया
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