हर बात का अंत है
अंत के बाद
नये बात की शुरूआत है
कितना मैं चिल्लाऊँ
हर गली सुनसान है
कभी सुनने की कोशिश करोगे
तब तक मैंने कह दिया होगा
इन आँखों में झाँकना चाहोगे
पलकों ने मिटा दिया होगा।
एक दिन सबकुछ समझ जाओगे
पर वक्त के आगे कुछ न कर पाओगे
नये रास्ते नयी मंजिल
फिर भी कुछ हाथ में होगा
साथ में बिताए जो पल
ओ यादों का सिलसिला
हर वक्त हमारे साथ होगा।
डॉ.राजश्री मोकाशी
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