स्वास्थ्य
विधा-दोहा मुक्तक
बचपन कैसे स्वस्थ्य हो,मूल मंत्र ले जान।
शुद्ध पेयजल पान कर,दूर दस्त लें मान।
आंत्र रोग औ पीलिया ,हो उपचार तुरंत।
ताजा भोजन नित करें,निज उर्जा हो भान।
सागर तीरे बैठ कर,करें निराशा दूर।
कलकल नदिया कर रही,मन की आशा पूर।
स्वस्थ रहे तनमन सदा,करें प्रकृति अनूभूति।
प्रातः नित अभ्यास कर,सदा रहेंगे सूर।
डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
वरिष्ठ परामर्श दाता, प्रभारी रक्त कोष
जिला चिकित्सालय सीतापुर।
9450022526
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