पायल
विधा-विधाता मुक्तक
सजी पायल बजे घुंघरू,करे छम छम सुहाती है ।
बजी पायल करे घायल ,सजे पग में लुभाती है ।
चुराए मन मयूरा थाम लो उड़ती उमंगों को।
बड़ी चालाक है पायल, चुरा कर मन रिझाती है।
डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
वरिष्ठ परामर्श दाता, प्रभारी रक्त कोष
जिला चिकित्सालय, सीतापुर।
9450022526
स्वरचित व मौलिक रचना
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