आलेख
एक धुआँ, अनेक खतरे -
पैसिव स्मोकिंग का स्वास्थ्य पर अदृश्य प्रभाव
— नन्दलाल भारती
कवि, कथाकार एवं सामाजिक चिंतक
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धुआँ कुछ क्षणों के लिए दिखाई देता है और फिर हवा में घुल जाता है। लेकिन क्या उसके साथ खतरा भी समाप्त हो जाता है? शायद नहीं। सिगरेट, बीड़ी या किसी अन्य तंबाकू उत्पाद का धुआँ केवल उसे पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद परिवार, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग और सहकर्मी भी उस धुएँ का हिस्सा बन जाते हैं।
यही पैसिव स्मोकिंग, यानी दूसरे व्यक्ति के तंबाकू के धुएँ को साँस के साथ भीतर लेना है। यह ऐसा स्वास्थ्य जोखिम है जिसमें प्रभावित व्यक्ति ने स्वयं सिगरेट न पी हो, फिर भी उसके शरीर को धुएँ में मौजूद जहरीले रसायनों का सामना करना पड़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू से हर वर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है, जिनमें 16 लाख से अधिक ऐसे गैर-धूम्रपान करने वाले लोग हैं जो दूसरे के धुएँ के संपर्क में आते हैं। WHO — World Health Organization/विश्व स्वास्थ्य संगठन यह भी स्पष्ट करता है कि तंबाकू के धुएँ के संपर्क का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है।धुआँ केवल धुआँ नहीं है
तंबाकू के धुएँ में हजारों रसायन पाए जाते हैं। CDC —(Centers for Disease Control and Prevention) रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र/के अनुसार व्यावसायिक तंबाकू के धुएँ में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें सैकड़ों हानिकारक और लगभग 70 कैंसर पैदा करने वाले रसायन हैं।
जब कोई व्यक्ति सिगरेट पीता है तो उसके आसपास बैठा व्यक्ति भी उस धुएँ को साँस के साथ भीतर ले सकता है। इसीलिए पैसिव स्मोकिंग को केवल सामाजिक असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या माना जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि “थोड़ा-सा धुआँ नुकसान नहीं करेगा” जैसी धारणा सही नहीं है। CDC के अनुसार थोड़े समय का संपर्क भी हृदय और रक्तवाहिकाओं पर तत्काल प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
हृदय पर चुपचाप बढ़ता खतरा: हृदय हमारे शरीर का वह केंद्र है जो हर क्षण रक्त को पूरे शरीर तक पहुँचाता है। पैसिव स्मोकिंग इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
दूसरे के धुएँ में मौजूद रसायन रक्तवाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचा सकते हैं और रक्त के प्लेटलेट्स को अधिक चिपचिपा बना सकते हैं। इससे रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ सकती है और हृदयाघात तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
CDC के अनुसार धूम्रपान न करने वाले लोगों में नियमित पैसिव स्मोकिंग हृदय रोग के जोखिम को लगभग 25–30 प्रतिशत और स्ट्रोक के जोखिम को लगभग 20–30 प्रतिशत बढ़ा सकती है।
इसलिए घर में कोई व्यक्ति यह कहकर निश्चिंत नहीं हो सकता कि “मैं तो सिगरेट नहीं पीता, मुझे क्या खतरा?” यदि वह लगातार दूसरे के धुएँ में साँस ले रहा है तो जोखिम उसके शरीर तक भी पहुँच रहा है।
स्ट्रोक : धुएँ का एक और गंभीर परिणाम:
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति बाधित होती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है। पैसिव स्मोकिंग रक्तवाहिकाओं और रक्त के सामान्य व्यवहार को प्रभावित कर सकती है और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती है।
इसका अर्थ यह नहीं कि धुआँ हर व्यक्ति में सीधे स्ट्रोक पैदा करेगा, क्योंकि स्ट्रोक के कई अन्य कारण और जोखिम कारक भी होते हैं। लेकिन धूम्रपान करने वाले के आसपास लगातार रहना एक ऐसा जोखिम है जिसे टाला जा सकता है।
फेफड़ों की साँस में उतरता धुआँ:
फेफड़े हवा और शरीर के बीच जीवनदायी आदान-प्रदान का माध्यम हैं। हम जिस हवा में साँस लेते हैं, उसका सीधा संबंध हमारे फेफड़ों के स्वास्थ्य से है।
पैसिव स्मोकिंग से गैर-धूम्रपान करने वाले वयस्कों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ता है। CDC के अनुसार दूसरे के धुएँ के संपर्क में आने वाले गैर-धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम लगभग 20–30 प्रतिशत अधिक हो सकता है।
बच्चों में इसका प्रभाव और गंभीर हो सकता है। धुएँ के संपर्क से श्वसन संक्रमण, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया, कान के संक्रमण, अधिक बार और अधिक गंभीर अस्थमा तथा फेफड़ों के विकास की गति धीमी होने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
अस्थमा से पीड़ित बच्चे के लिए तो दूसरे का धुआँ तत्काल समस्या पैदा कर सकता है और अस्थमा का दौरा ट्रिगर कर सकता है।
गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु:
पैसिव स्मोकिंग का सबसे संवेदनशील पक्ष गर्भावस्था है। गर्भस्थ शिशु स्वयं धूम्रपान नहीं कर सकता, फिर भी माँ के आसपास का तंबाकू का धुआँ उसके विकास को प्रभावित कर सकता है।
CDC के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पैसिव स्मोकिंग का संपर्क कम जन्म-वजन से जुड़ा है और समय से पहले प्रसव का जोखिम भी बढ़ सकता है। जन्म के बाद धुएँ के संपर्क में आने वाले शिशुओं में अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS), कान और फेफड़ों के संक्रमण तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का जोखिम अधिक होता है।
इसलिए गर्भवती महिला के सामने धूम्रपान न करना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि माँ और आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा का प्रश्न है।
बच्चों की साँसें सबसे अधिक असुरक्षित:
बच्चे अपने लिए वातावरण का चुनाव नहीं कर सकते। यदि घर में माता-पिता या कोई अन्य सदस्य नियमित रूप से धूम्रपान करता है तो बच्चे अनजाने में उसके धुएँ के संपर्क में आते रहते हैं।
उनका शरीर अभी विकसित हो रहा होता है और फेफड़े भी पूरी तरह विकसित नहीं होते। इसलिए पैसिव स्मोकिंग उनके लिए विशेष रूप से नुकसानदेह हो सकती है। इससे खाँसी, घरघराहट, साँस लेने में परेशानी, श्वसन संक्रमण, कान की समस्याएँ और अस्थमा जैसी स्थितियाँ बढ़ सकती हैं।
सबसे दुखद स्थिति तब होती है जब कोई व्यक्ति अपने बच्चे से प्रेम तो करता है, लेकिन उसी प्रेम की छाया में उसे धुएँ से बचाने की सावधानी नहीं बरतता।
शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी प्रभाव:
तंबाकू का धुआँ केवल फेफड़ों का विषय नहीं है। तंबाकू से जुड़े विषैले पदार्थ शरीर की रक्तवाहिकाओं, हृदय और प्रतिरक्षा तंत्र सहित अनेक जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। WHO के अनुसार तंबाकू का उपयोग शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुँचा सकता है।
पैसिव स्मोकिंग के संबंध में सबसे मजबूत प्रमाण हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों के कैंसर, श्वसन रोगों तथा गर्भावस्था और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों के लिए उपलब्ध हैं। इसलिए हर बीमारी को केवल पैसिव स्मोकिंग से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन इसे एक गंभीर और रोके जा सकने वाले स्वास्थ्य जोखिम के रूप में समझना आवश्यक है।
घर ही यदि धुएँ से भर जाए तो?-
कई परिवारों में धूम्रपान घर के भीतर होता है। धूम्रपान करने वाला व्यक्ति शायद यह सोचता हो कि कुछ मिनट बाद धुआँ चला जाएगा। लेकिन धुएँ के हानिकारक तत्वों का संपर्क केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।
CDC के अनुसार घर और कार्यस्थल पैसिव स्मोकिंग के प्रमुख संपर्क-स्थलों में हैं। बहुमंजिला इमारतों में धुआँ दूसरे हिस्सों तक भी पहुँच सकता है।
इसलिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के आसपास धूम्रपान न करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे सुरक्षित उपाय धूम्रपान-मुक्त वातावरण बनाना है।
मृत्यु के आँकड़े हमें क्या बताते हैं?-WHO के वर्तमान वैश्विक अनुमान के अनुसार तंबाकू से संबंधित मौतों में 16 लाख से अधिक मौतें ऐसे गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों की हैं जो दूसरे के धुएँ के संपर्क में आते हैं।
यह संख्या केवल आँकड़ा नहीं है। इसके पीछे किसी का पिता, माँ, बच्चा, पति, पत्नी, भाई, बहन या मित्र हो सकता है।
यही कारण है कि पैसिव स्मोकिंग को व्यक्तिगत आदत का विषय भर मानना पर्याप्त नहीं है। यह परिवार और समाज के स्वास्थ्य से जुड़ा प्रश्न है।
बचाव का रास्ता:
पैसिव स्मोकिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका धूम्रपान-मुक्त वातावरण बनाना है। घर, वाहन और कार्यस्थल को धूम्रपान-मुक्त रखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
जो व्यक्ति धूम्रपान करता है, उसके लिए सबसे बेहतर स्वास्थ्य कदम तंबाकू छोड़ना है। परिवार को उसे अपमानित करने के बजाय सहयोग देना चाहिए। आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह और तंबाकू-त्याग सहायता का सहारा लिया जा सकता है।
बच्चों को बचपन से यह समझाना भी जरूरी है कि धूम्रपान केवल स्वयं को नुकसान पहुँचाने का मामला नहीं है; उसका धुआँ आसपास के लोगों की साँसों में भी पहुँचता है।
धुंआ आपका हो सकता है, खतरा सबका-
एक सिगरेट कुछ मिनटों में खत्म हो जाती है, लेकिन उसका धुआँ किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर तक पहुँचकर स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर डाल सकता है।
पैसिव स्मोकिंग हमें एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है—अपनी आदतों का प्रभाव केवल अपने शरीर तक सीमित नहीं होता।
घर में एक व्यक्ति का धुआँ पूरे परिवार की साँसों को प्रभावित कर सकता है। एक बच्चे की मासूम साँस, एक गर्भवती माँ की सुरक्षा, एक बुजुर्ग का कमजोर हृदय और किसी स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति की रक्तवाहिकाएँ—इन सबको धुएँ से बचाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।
इसलिए प्रश्न केवल यह नहीं कि “मैं सिगरेट पीता हूँ या नहीं?”
प्रश्न यह भी है—
“क्या मेरी आदत के कारण किसी दूसरे को धुआँ पीना पड़ रहा है?”
यदि उत्तर हाँ है, तो बदलाव की शुरुआत आज से ही की जा सकती है।
क्योंकि—
**एक धुआँ, अनेक खतरे;
लेकिन धूम्रपान-मुक्त वातावरण—अनेक जीवनों की सुरक्षा।**
नन्दलाल भारती
nlbharatiauthor@gmail.com
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