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“पति उत्पीड़न: एक अनसुना सच”

 

“पति उत्पीड़न: एक अनसुना सच”

दोस्तों नमस्कार, मैं हूँ नन्दलाल भारती और एक स्वतंत्र लेखक हूँ l

आज मैं एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहा हूँ जिस पर समाज अक्सर चुप्पी साध लेता है—जी हाँ पति उत्पीड़न।

जब भी "उत्पीड़न" की बात आती है, तो सबसे पहले हमारी सोच स्त्रियों की ओर जाती है। लेकिन समाज का दूसरा पक्ष भी है—कई बार पुरुष भी पीड़ित होते हैं। दुख की बात है कि उनकी पीड़ा को न तो कोई सुनता है और न ही मान्यता देता है।इसी दुःख और संत्रास में पति टूट जाता है, कई बार तो जान तक चली जाती है l दोस्तों,विवाह केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन है।

बहू का दायित्व है कि वह ससुराल में सम्मानपूर्वक संबंध बनाए।

साथ ही मायके से भी मधुर रिश्ता बना रहे, लेकिन इतना कि यह उसके नए परिवार पर बोझ न बने।

सास-ससुर, ननद-देवर से दूरी या नफरत बढ़ाना, पति को अपने ही परिवार से अलग करना—यह स्वस्थ पारिवारिक वातावरण को नष्ट कर देता है।

-पति परिवार का स्तंभ है। पत्नी, पति को ही पीड़ित कर —

आर्थिक और मानसिक रूप से नुकसान करे,

मायके का पूरा खर्च पति पर डाल दे,

मानसिक रूप से उसे अपमानित करे,

तो यह केवल पति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की संरचना को हानि पहुँचाता है।

विवाहित लड़की की माँ यदि बार-बार बेटी के जीवन में हस्तक्षेप करती है, तो वह अनजाने में उसकी गृहस्थी को असफल बना सकती है।

माँ का स्नेह ज़रूरी है, परंतु विवाहित बेटी को आत्मनिर्भर और संतुलित रहने की सीख भी उतनी ही ज़रूरी है।

“हर माँ को यह समझना चाहिए कि अपनी बेटी की खुशहाल जिंदगी ससुराल से ही बनती है, मायके से नहीं।”

समाज में पुरुषों की पीड़ा अक्सर मजाक बना दी जाती है।

मानसिक दबाव,

आर्थिक शोषण,

चरित्र पर सवाल उठाना,

और घर-परिवार से दूर करना—

यह सब पति उत्पीड़न के रूप हैं।

दुख की बात यह है कि पुरुष की आँखों के आँसू अक्सर अदृश्य रह जाते हैं।

यदि हम सच में परिवार को मजबूत देखना चाहते हैं तो—

बहू-बेटी को संतुलित जीवन जीने की शिक्षा देनी होगी।

माँ को यह समझना होगा कि बेटी का भविष्य उसके पति और ससुराल से जुड़ा है।

और हमें यह मानना होगा कि पति उत्पीड़न भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना पत्नी उत्पीड़न। ऐसा नहीं कि पत्नी के इस अपराध के खिलाफ क़ानून और सजा है l

भारत में "पति उत्पीड़न" (Husband Harassment) को लेकर सीधा-सीधा कोई विशेष कानून नहीं है, क्योंकि अधिकांश कानून स्त्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। लेकिन अगर पत्नी अपने पति को मानसिक, शारीरिक, आर्थिक या सामाजिक रूप से प्रताड़ित करती है तो पति विभिन्न कानूनी प्रावधानों जैसे- धारा 498A IPC (Indian Penal Code) धारा 323 IPC (मारपीट) धारा 406 IPC (अमानत में खयानत)धारा 420 IPC (धोखाधड़ी) धारा 494 और 495 IPC (दूसरी शादी करना) धारा 497 (व्यभिचार/Adultery)घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act) मानहानि (Defamation – धारा 499, 500 IPC) क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) धारा 9, 13, 27 ( का सहारा पत्नी उत्पीड़न के खिलाफ लिया जा सकता है।

संभावित सज़ाएँ

323 IPC – 1 साल तक की कैद या जुर्माना।

406 IPC – 3 साल तक की कैद + जुर्माना।

420 IPC – 7 साल तक की कैद + जुर्माना।

498A IPC (झूठा केस करने पर) – पत्नी के खिलाफ झूठी गवाही/धोखाधड़ी पर 7 साल तक की सजा हो सकती है।

मानहानि (500 IPC) – 2 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों।घूंट-घूंट कर मर रहे पत्नी पीड़ित किसी प्रोफेशनल एडवोकेट से संपर्क कर आवश्यक कदम उठा सकते हैं

दोस्तों यह जानकारी हमने ऑनलाइन sourses जुटाया है,मैं भी MA (सोशियोलॉजी)Post Graduate डिप्लोमा in ह्यूमन रिसोर्स and LLB (Hons) डिग्रीधारी हूँ पर प्रैक्टिस नहीं करता l कुछ तो इतने किस्से सुने कि बिना दहेज का बेटे का ब्याह करने पर जीवन नरक बना दिया गया,कुछ सच्चे मामले मुझे मालूम चलें तो हमने कलम उठा लिया बस इतना ही l

दोस्तों मुझे उम्मीद है, यह जानकारी उपयोगी साबित होगी l

पति और पत्नी का रिश्ता विश्वास, सम्मान और सहयोग पर चलता है।

यदि किसी एक पक्ष पर शोषण बढ़ जाए तो यह संबंध नहीं टिक सकता टिक भी जाता है तो दर्द आंसू के सिवाय और कुछ नहीं जीवन में हाथ लगता l

हम सबको मिलकर यह वातावरण बनाना होगा कि—

न पति पत्नी को दबाए,

न पत्नी पति को सताए,

मायके की लूट, लालच और न ही मायके-ससुराल का टकराव किसी की गृहस्थी को बर्बाद करे।

आइए, हम सब मिलकर इस अनसुने सच को स्वीकारें और आवाज़ उठाएँ कि—

“पति उत्पीड़न भी अन्याय है, और अन्याय चाहे किसी के साथ हो, उसका विरोध ज़रूरी है।”

धन्यवाद।

नन्दलाल भारती



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