पानी जीवन है,अनदेखी मौत
वाह रे प्रशासन,चेतावनी के बाद भी चुप्पी
चुप्पी टूटी नहीं,चीखें शुरू हुई,फिर मौतें,
भगीरथपुरा में जल प्रदूषण से हुई मौतें
दुर्घटना नहीं,
प्रशासनिक की लापरवाही से हुआ
जघन्य अपराध है l
अपराध की सजा निर्दोष,लोगों ने जान देकर चुकाई है
लोगों ने की थी शिकायतें
बदबूदार पानी की,बीमार होते लोगों की
सवाल तो बनता है?
जब शिकायतें थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
आम आदमी की कौन सुनता है,
सच है ना साहब?
सवाल तो और भी हैं?
क्या गरीब बस्तियों के लोगों को साफ पानी,
पाने और पीने का अधिकार नहीं?
क्या जल परीक्षण केवल कागज़ों पर होता है?
और फ़ाइलों में दम तोड़ देता है
क्या मौतों के बाद जाँच,
और
मुआवज़ा ही प्रशासन की आखिरी जिम्मेदारी होती है?
क्या जवाबदेही तय होंगी?
क्या लापरवाह जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को सजा होंगी?
प्रदूषित जल से भगीरथपुरा की मौतें,
याद दिलाती हैं, पानी जीवन है—और पानी की अनदेखी मौतl
याद रखना साहब,
भगीरथपुरा जल प्रदूषण की जांचे,
फाइलों में दफन हो गई तो,
किसी और कॉलोनी की बारी तय है l
वक्त है प्रशासन संवेदना नहीं, संरचना बदले
दूषित पानी ना बहे नलों में, ना कोई पीये
ना कोई बूढ़ा मरे,ना मरे कोई जवान
ना किसी माँ की गोद सूनी हो
ना किसी बच्चे के गिलास में अब भरे जहर
साफ पानी शहर को मिले ऎसा सुनिश्चित होय
स्वच्छ और स्वस्थ बना रहे इंदौर शहर l
नन्दलाल भारती
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