Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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नववर्ष तेरा आना मंगलमय हो

 

नववर्ष तेरा आना मंगलमय हो

आँखों में आंसू दबाते हुए 

गुजरते हुए साल ने आखिरी पल में

आते हुए साल की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला

देखो विज्ञान के युग में भी, 

आज के आदमी के पापों का भार,

जातिवाद,दमन-शोषण, बलात्कार,

अन्याय,अत्याचार,भ्रष्टाचार,

दलित उत्पीड़न -नारी उत्पीड़न का बोझ ढोता 

घाघ राजनीति के दंश का जहर,

पीता हुआ आ रहा हूँ

तड़पते-तड़पते यहां तक पहुँचा हूँ

तुम्हें  सौंपने पापों का बोझ

पापी-पाषाणहृदय, क्रूर हिंसक 

करते हैं बहू -बेटियों का चीर-हरण

ये गिद्ध नारी देह चाव से नोंचते हैं

पवित्र धरती  बनती जा रही है

नारी देह नोंचने शीलभंग करने वाले अमानुषों का ठिहा 

पवित्र धरती  को बचाना पुत्र

जहाँ गंगा, जमुना,नर्मदा बहती है

और हाँ एक बात याद रखना

आदमियत मरने ना पाए

लाज माँ बहन-बेटी की रखना

नारी का करें शीलभंग जो पापी

उस पाषाण हृदय क्रूर हिंसक  दुराचारी को

फांसी के फंदे तक पहुंचाना

प्रिय पुत्र पवित्र भूमि की रक्षा करना

स्त्रियों,शोषितों-पीड़ितों के लिए मंगलमय बनना

कहते हुए गुजरते साल ने चौखट से बाहर कदम रखा

हो गया ऐलान

नव वर्ष तेरा आना मंगलमय हो l

नन्दलाल भारती

31/12/2025

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