15 अगस्त के शुभअवसर पर अपनी बात
| Fri, Aug 15, 11:26 AM (21 hours ago) |
दोस्तों और अपने मेरे प्यारे देशवासियों,
आज का दिन सिर्फ एक तारीख को याद करने के लिए नहीं है, बल्कि उस जज़्बे, उस बलिदान और उस सपने को पुनः जीवित करने के लिए, जिसे हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने रक्त और त्याग से सींचा।
15 अगस्त का दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिस आज़ादी के लिए लाखों लोग जेल गए, फाँसी के फंदे पर झूल गए, अपने घर-परिवार को छोड़कर संघर्ष में कूद पड़े—उस आज़ादी का आज हम किस तरह उपयोग कर रहे हैं।
हमारे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानी सिर्फ राजनीतिक आज़ादी नहीं चाहते थे। वे चाहते थे एक ऐसा भारत, जहाँ भूख पर ज्ञान की जीत हो, अंधविश्वास पर विज्ञान की जीत हो, और नफ़रत पर इंसानियत की जीत हो।
लेकिन साथियों,
आज जब हम चारों ओर देखते हैं, तो पाते हैं कि चुनौतियाँ बदल गई हैं, लेकिन संघर्ष अभी भी बाकी है।
भ्रष्टाचार हमारे सिस्टम में दीमक की तरह फैल रहा है।
बेरोजगारी हमारे युवाओं के सपनों को निगल रही है।
सोशल मीडिया की चमक में हम कभी-कभी सच्ची खबरों और सच्चे मूल्यों से दूर हो रहे हैं।
और सबसे बड़ी चिंता—हमारे बीच बढ़ती वैचारिक दूरी और आपसी अविश्वास।
याद रखिए, आज़ादी केवल झंडा फहराने से नहीं बचती, बल्कि एक-दूसरे का हाथ थामने से बचती है।
हमारे पुरखों ने हमें जो भारत दिया, वह उनकी मेहनत और बलिदान का नतीजा है; लेकिन आने वाली पीढ़ी को हम जो भारत देंगे, वह हमारे कर्म और सोच का नतीजा होगा।
इसलिए, आज का दिन हमें एक प्रतिज्ञा दिवस की तरह मनाना चाहिए—
हम सत्य और ईमानदारी को अपने जीवन में प्राथमिकता देंगे।
हम शिक्षा को हथियार बनाएँगे, नफ़रत को नहीं।
हम देश की प्रगति में अपना हिस्सा निभाएँगे—चाहे वह मतदान करके हो, स्वच्छता में योगदान देकर हो, या ज़रूरतमंद की मदद करके।
जैसा कि सुभाष चंद्र बोस ने कहा था—
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा"—
आज हम कहें—
"हम देश को कर्म देंगे, और देश हमें एक उज्ज्वल भविष्य देगा।"
प्रिय साथियों,
भारत की असली ताकत न केवल उसकी सेना या उसकी अर्थव्यवस्था में है, बल्कि उसकी एकता, विविधता और जनमानस की अच्छाई में है। कुछ घाघ किस्म के राजनेताओं ने धर्म को सत्ता हथियाने का हथियार बनाकर लोकतंत्र की दिशा बदलना चाहते हैं, हमें ऐसे घाघ राजनेताओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए भी सचेत होना होगा, धर्मानधता से देश का विकास नहीं हो सकता है, देश का विकास समान शिक्षा, समान स्वास्थ्य सुविधाएं,समान नागरिकता,औद्योगिक क्रांति,कृषि क्रांति,सुरक्षित देश से सम्भव है l
दोस्तों अगर हम मिलकर अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो हम अपने सपनों का भारत” बना पाएंगे जिसकी कल्पना स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी—एक ऐसा भारत जहाँ हर नागरिक को गर्व हो यह कहने में—
भारत बुद्ध की भूमि है"मैं भारतीय हूँ, मेरा भारत महान है।"
अंत में, मेरी एक कविता,
आज़ादी हमारा अभिमान हैं,तिरंगा हमारी पहचान हैं
हम भारत के लोग, हर घर तिरंगा लहराये
क्या विहसती शान है!
अमर शहीदों ने लहू से सींचकर,
आजादी का किया प्राण- प्रतिष्ठान है,
ये अपनी आजादी, शहीदों का एहसान है
रानी लक्ष्मीबाई,मंगल पांडे,भगत सिंह,
सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद,सुभाष चंद्र बोस,
मातादीन भंगी,उदया चमार ,बांके चमार, गंगादीन भंगी
बाबूराम मेहतर, बाबू मंगू राम, भोला पासवान
मक्का पासी, चेतराम जाटव,पन्नालाल ,वरुण पाल,
संजीवप्पा, रामचंद्र, वीरप्पा वीरा पासी,
रमापति चमार, मातादीन बाल्मीकि, तिलक चंद कुरील
वाह रे माटी के लाल,आज़ादी के लिए
देश की माटी पर हो गए कुर्बान
देश के राष्ट्रीय उत्सव का यह दिन आज
जिम्मेदारी, आज़ादी की कीमत समझने का दिन आज
तिरंगा कभी झुकने ना पाए
लोकतंत्र मिटने ना पाए
तिरंगा हमारी पहचान है
हम भारत के लोग आज़ादी हमारी
संविधान अपना दुनिया में पहचान है
गुमनाम,अनाम-नाम, ज्ञात, अज्ञात सभी शहीदों को नमन
आजादी की रक्षा अपनी जिम्मेदारी, आपका अभिनन्दन
अमर शहीदों की जय,जय हिन्द, जय भारत जय संविधान l
नन्दलाल भारती
दोस्तों, 15 अगस्त को केवल एक तारीख न मानें, बल्कि एक प्रेरणा की ज्योति मानें—जो हमें यह याद दिलाए कि देश के लिए काम करने का समय हमेशा "आज" है, कल नहीं।
क्योंकि आज़ादी की असली सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि हमारे दिलों और विचारों में होती है।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!
नन्दलाल भारती
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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