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''दलित भारत के लोग"

 

''दलित भारत के लोग"।

-नन्दलाल भारती
इंसान होकर हम दलित हो गए
और भी दलदल में दकेल दिए गए
सदियों दबे मरते सपने कंधे पर रह गए
हम दलित गए, अछूत हो गए l
सदियों दबे आदमी का लूट गया जमीं आसमान
जंजीरों में जकडे हाथ -पैर अकड़े
दर्द का इंकलाब जागा जंजीरे चटकी
जीने मरने की तमन्ना लेकर खड़े हुए
गरजे पोथी लहराये औकात बताये
राम की मर्जी का भय दिखाए
तुम्हारी यही सब भाग्य बताये
तुम्हारी पहचान यही है
हमने जब धरती,आसमान पर अधिकार माँगा
विरोधी समाज की दीवारें ऊँची और नुकीली हुई
खाई खोदी गयी गहरी काले पानी की सजा जैसी
कमर में झाड़ू गर्दन में हड़िया बंधी
महिलाओं के स्तन पर टैक्स लगे,
नांगेली मईया ने स्तन काट दिए
पति चिरुकंदन चिता में कूद प्राण दिए
टीपू सुल्तान ने न्याय किया,
स्तन टैक्स पर विराम लगा
मानवता के खलनायको ने, नायक टीपू सुल्तान को,
खलनायक बता दिया
सदियों तक अमानवीय व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष चला
बाबासाहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर के शब्द गूंजे
शिक्षा ढाल, संघे शक्ति बनी ताकत
संघर्ष दलित भारत पहचान बन गयी
हाय रे जातिवादी नफ़रत वाले वे लोग
हम मूलनिवासी,भारत के लोग दलित हो गए
सदियों बाद हाथ कलम आयी शिक्षा से जीवनदान मिला
बदले युग में तनिक स्थान मिला
सदी नहीं बीती जातिवाद का दीमक बिलबिलाया
आत्मा कुतरना शुरू किया
फिर क्या?
शिक्षा और सपनों पर ग्रहण शुरू हुआ
शिक्षा पर अंकुश सपनों की हत्या हो गयी
दलितों की संघर्ष यात्रा दया की तो बिल्कुल नहीं
अधिकार की यात्रा है, अत्याचार के विरुद्ध यात्रा किये
मूलनिवासी दलित हार कहानी नहीं
परिवर्तन की यात्रा करते हैं
संघर्ष की वह गाथा लिखते हैं जो तूफाने भी नहीं बुझा सकती
दलित भारत की मशाल जलाये रखेगा
चले तूफान ना परवाह,उजियारा और बढ़ेगा
रखना याद अधिकार छीनने वालों
ये कायनात साथ खड़ी सवाल करेगी
शोषण -उत्पीड़न,अत्याचार की आग कब बुझेगी
यह दिन भी बीत और वह भी दिन आएगा
जब मानवता-समानता के फूल खिलेगे
परिवर्तन आएगा,दलित भारत के हाथ अधिकार लगेगा
दुनिया कहेगी वह थी परिवर्तन की यात्रा
दलित भारत हर्षएगा आसमान फूल बरसाएगाl
नन्दलाल भारती
23/06/2026
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