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लघुकथा: आवन्टन क्रांति
नमस्ते......काका कैसे हो?
खुश रहो बेटा! ठीक तो बिल्कुल नहीं हूँ l चिंता की चिता पर बैठा आवन्टन के इंतजार में जीवन बीता रहा हूँ,शरद काका उदासी के दलदल में डूबते हुए बोले थे l
क्या कह रहे हो काका आवन्टन का इंतजार ?
हाँ बेटा..... देश की सरकार जुमले पर,ग्राम पंचायत सामंतवादियों के हुक्म पर चल रही है तो दलित मजबूरों के हिस्से इंतजार के अलावा और क्या बचा शरद बोले?
काका इतनी निराशा क्यों समीर पूछा?
बेटा क्या कहें? पंद्रह लाख रूपये हर खाते में जुमला निकला,बेरोजगारी और महंगाई तोहफे में मिली l
गांव के दलितों का जिस गांव समाज की जमीन से भूमिहीनता का अभिशाप कटने वाला था, वह भूमि दलित प्रधाइन फिरतीदेवी ने सामंतवादियों को खेल के मैदान के पर नाम आवन्टित कर दी l दलित बहुल गांव के दलितों के लिए पेट पालने के लिए जमीन नहीं है, सामंतवादियों के लिए गांव समाज की जमीन खेल का मैदानl हाय रे खलनायिका तूने ये क्या कर दिया?
जो काम सदियों से सामंवादी नहीं कर पाए थे, वह काम पांच साल में फिरतीदेवी से करवा लिए l फिरतीदेवी तू गांव के दलितों की अपराधिनी,दलित समाज की कलंकिनी बन गयी है शरद बोले l
काका ये अवसरवादी लोग शोषितों के उम्मीदों का कत्ल कर कब तक राज करेंगे,इनका सर्वनाश निश्चित है समीर बोला?
बेटा अब तक जितने सामंतवादी या गैरसामंतवादी प्रधान बने हैं सब गांव के दलितों के हितों के दुश्मन ही बने हैंl बेटा,सामंतवादियों के पुरखों ने हम दलितों के पुरखों का हाथ तोड़कर जबरदस्ती अंगूठा लगवाकर भूमिहीन बनाये थेl
लोकतंत्र के जमाने में आवन्टन की उम्मीद थी पर सामंतवाद हावी है l येनकेन प्रकारेण वही सामंतवादी लोग गांव समाज की नब्बे प्रतिशत जमीन पर कब्जा जमाये हुए हैl गांव के दलितों को ना रोटी की ठिकाना न रहने के घर का l
क्या कह रहे हो काका समीर पूछा?
सच कह रहा हूँ बेटा दलितों को जिस गांव समाज की जमीन पर आवन्टन की उम्मीद थी, वह भूमि दलित प्रधाइन फिरतीदेवी ने सामंतवादियों के लिए खेल के मैदान के नाम पर आवन्टित कर खलनायिका बन गयी पर सामंतवादी कहाँ उसके हुए? बेटा दलितों के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा?
काका गांव के दलित मिलकर तहसीलदार,कलेक्टर,मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को अर्जी दें तो जरूर सुनवाई होगी,वरना इंतजार करो कभी कोई बहन मायावती,श्री अर्जुन सिंह या वी. पी. सिंह जैसा कोई गांव से ही महानायक पैदा हो जाये, भूमिहीनता के अभिशाप से मुक्त करा दे l एक और रास्ता है काका समीर बोला l
वह कौन सा रास्ता है बेटा शरद पूछे?
गांव समाज की जमीन की लूट के खिलाफ धरना-प्रदर्शन आन्दोलन l
शरद बोले-भूमि आवन्टनक्रांति!
हाँ काका....आवन्टनक्रांति!
शरद बोले- सोयी हुई कौम से उम्मीद क्या करें? जब फिरती देवी बिक गयी और दलितों हाथ काट गयी तो किससे उम्मीद करें?
समीर बोला-काका,यही देश और दलितों का दुर्भाग्य है l
नन्दलाल भारती
04/12/2025
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