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उधार की तरक्की

 

उधार की तरक्की

मोतीलाल  किसी तकलीफ में हो ? तुम्हारी पलकें गीली हैं कहते हुए  लालसिंह हाँफते हुए बैठ गए l

कहाँ से आ रहे हो चौधरी लालसिंह ?

तुमसे मिलने की इच्छा हुए आ गया l

बीपी बढ़ी है क्या ? हांफ रहे हो l

हाँ मोती भाई बढ़ती उम्र में शुगर, बीपी और ना जानें सब बढ़ रहा है l मेरी छोड़ो,दोस्ती की कसम सच-सच बताओ तुम्हारी पलकें गीली क्यों हो रही है?

चौधरी कहते है ना बढ़ती उम्र में दाँत सबसे पहले साथ छोड़ता है,ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ है l

बुझनी मत बुझाओ मोती असली वजह बताओ l

प्राइवेट नौकरी से रिटायर क्या हुआ भाई बेगाना हो गया? वही भाई जो और जिसका परिवार मेरी पीठ पर बैठकर तरक्की की राह दौड़ रहा वही भाई  और उसका परिवार ही नहीं उसके रिश्तेदारों के लिए बेगाना हो हूँ उन्हें लगता है कि कहीं उनसे मदद ना मांग लूं l

तुम्हें किसी के  मदद की क्या जरुरत है, तुम्हारे बेटा-बेटी तो खुद सक्षम हैंl तुम्हारे भाई को उधार की तरक्की का घमंड आ गया हैl 

लालसिंह मेरी तो प्रार्थना  है कि  मेरे भाई और उसके  परिवार तरक्की की  बनी  रहे l बहुत त्याग करना पड़ा है भाई l

मोती तुम्हारे भाई साहब को उधार की तरक्की मुबारक, तुम्हें तुम्हारा परिवार l

नन्दलाल भारती

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