आत्मसम्बल
बाबूजी पसीना-पसीना क्यों हो रहे हो ? पिता की सेवा सुश्रुषा में लगी बीटिया अपने चेहरे पर उभर रहे दुःख के भाव को छिपाते हुए पूछी ?
मैं यहीं बैठक कक्ष में काउच में लेटा हुआ था कि मुझे आवाज आई भाईसाहब कहां हो या कैसे हो? मैं आहिस्ते से उठकर दरवाजा खोला वहां तो कोई नहीं था।
बाबूजी छोटी बहन की शादी चार दिन बाद है,बीटिया याद दिलाते हुए बोली।
हां बेटा मुझे भी याद है।
बाबूजी आर्थिक सम्बल तो दे दिया है पर आत्मसम्बल नहीं मिल रहा है।
बेटा तबियत काबू में आ गया तो भले ही फ्लाइट से जाना पड़ेगा भी तो बारात दरवाजे पर लगते-लगते जरूर पहुंच जायेंगे।
हां बापूजी चाचा को आत्मसम्बल जरुर मिलना चाहिए बीटिया बोली ?
नन्दलाल भारती
०१/०६/२०२४
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