लघुकथा:आदमी जो देता, वही पाता है l
कहावत नहीं साहब सच है,स्वर्ग-नरक यही जमीन हैं,जो दोगे, वही पाओगे,जैसी करनी वैसी भरनी l ऐसी ही यह कहानी- आदमी जो देता, वही पाता है l
पति-पत्नी बड़ी गरीबी से उपर उठे थे l बेटा को पढ़ा लिखाने में इतने मशगूल हो गए थे कि खुद के जीवन के आनंद के लिए सोच भी नहीं पाए l बेटा प्रफुल्ल काबिल निकल गया, सारा दुःख-दर्द छू हो गया l घर में नई बहू भाग्यवती प्रवेश गाजे-बाजे से भी हुआ l
चोर मिजाज़ माँ-बाप की बेटी को पति प्रफुल्ल के अलावा परिवार के सभी दुश्मन लग रहे थे l इज्जतदार परिवार ने बहू को समझाने किए,पर दिल में कटार रखने वाली बहू तो दूसरी दुनिया की थी,माँ -बाप ने संस्कार ही ऐसे दिए थे l
परिवारजनों उत्पीड़न का इल्जाम लगाकर बहू पति को ले उड़ी l बूढ़े सास-ससुर सास-ससुर नसीब का खेल मानकर जीने के लिए पठन-पाठन,तप-ध्यान में आनंद तलाशने लगे l
प्रफुल्ल बेटा जयेश का बाप बन गया,पर पौत्र को देखने के लिए बूढ़ी आँखे थक रही थी l समय बदला जयेश बड़ा हुआ,जब उसे हकीकत मालूम हुई तो ननिहाल और माँ से उसे घृणा होने लगी l
जयेश ने माँ की खुशी की सारी भौतिक वस्तुओं का इंतजाम कर माँ को दूर दादा-दादी की अंगुली थाम लिया था l जयेश बूढ़े दादा-दादी को अंकवार में भर लिया जैसे पंछी अपने चूजे को पंखों के नीचे छिपा लेती हैं l
भाग्यवती के निष्कासन से सास-ससुर की आखों में अब बाढ़ थी, आख़िरकार उत्पाती दिमाग़ बहू भाग्यवती को गाजे-बाजे के साथ वापस लाया गया l बहुत कुछ बर्बाद कर भाग्यवती की अक्ल ठिकाने लग गयी l
सास-ससुर के माफ़ कर देने के बाद लोग कहाँ मानते हैं, लोग व्यंग कर ही देते हैं-आदमी जो देता, वही पाता है l
नन्दलाल भारती
19/09/2025
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