Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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स्वतंत्रता और स्वाभिमान

 

स्वतंत्रता और स्वाभिमान


धारा बहती प्रेम की, आजादी के गीत ।

  देश - भक्ति दिल में बसी,  हँसती गाती जीत।।

हँसती गाती , जश्न मनाती , आजादी में।

डोरी -डंडा , बाँधे झंडा , हर वादी में ।।

भारत प्यारा, जन का तारा , देश हमारा।

अमृत पर्व है , करे गर्व है , बहती धारा।।


सरहद पर हैं खड़े , सीना ताने वीर।

बनके अर्जुन  वीर वे , अरि को मारे तीर।।

अरि को मारें, भरे हुँकारें, दुश्मन  भागे।

  ध्वजा हाथ में,  भक्ति साथ में, बाँधे धागे।।

भू अंबर पर , हर घर - घर पर, बजता अनहद।

मैत्री धारा , वंदे  नारा ,  गाता सरहद।।


भारत गाता वीर की , गाथाओं में गान।

राष्ट्र प्रेम  जन में बसा, आजादी की शान ।।

आजादी की , हर वादी की ,  आन निराली।

खुशियाँ छायी , भक्ति नहायी , फूटी लाली।।

करते पूजा , वीर न दूजा ,रचे इबारत।

अमृत पर्व है , देश गर्व है ,करता भारत।।


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