स्वतंत्रता और स्वाभिमान
धारा बहती प्रेम की, आजादी के गीत ।
देश - भक्ति दिल में बसी, हँसती गाती जीत।।
हँसती गाती , जश्न मनाती , आजादी में।
डोरी -डंडा , बाँधे झंडा , हर वादी में ।।
भारत प्यारा, जन का तारा , देश हमारा।
अमृत पर्व है , करे गर्व है , बहती धारा।।
सरहद पर हैं खड़े , सीना ताने वीर।
बनके अर्जुन वीर वे , अरि को मारे तीर।।
अरि को मारें, भरे हुँकारें, दुश्मन भागे।
ध्वजा हाथ में, भक्ति साथ में, बाँधे धागे।।
भू अंबर पर , हर घर - घर पर, बजता अनहद।
मैत्री धारा , वंदे नारा , गाता सरहद।।
भारत गाता वीर की , गाथाओं में गान।
राष्ट्र प्रेम जन में बसा, आजादी की शान ।।
आजादी की , हर वादी की , आन निराली।
खुशियाँ छायी , भक्ति नहायी , फूटी लाली।।
करते पूजा , वीर न दूजा ,रचे इबारत।
अमृत पर्व है , देश गर्व है ,करता भारत।।
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