प्रभु शिव कृपा जब बरसे
डॉ मंजु गुप्ता
*सुपवित्रा वर्णिक छन्द*
जगत भगवन गुरुवर हमारा।
सकल अनपढ़ बन प्रभु सहारा।।
तन-मन-धन सब कुछ शिव तेरा।
हर पल प्रतिपल अरपण मेरा।।
मन पट पर निशि दिन तम छाया।
व्यथित हृदय निकट गुरुद पाया।।
चरण-शरण हृदय-सुमन लाई।।
सुरभित सुमिरन हरि छवि पाई।।
सुरमय अनहद मधु पद गाता।
गति लय मधुरिम रस बरसाता ।।
सुख-दुख जग सकल बिसर जाता।
मधुमय दरसन हरिहर भाता ।।
रहमत जब-जब शिव बरसाए।
अनगिन अनधन फल नर पाए।।
मनुज जनम सफल सुफल होता।
सम जड़-जग हृदय सकल होता।।
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