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दोहों में चाय के जाम

 

दोहों में चाय के जाम

डॉ मंजु गुप्ता



 चाय-पकोड़े संग में, महके सोंधी गंध।


भूला पाता है नहीं, भव्य स्वाद संबंध।।1




रचा पकोड़े चाय ने, दुनिया में इतिहास।


घर-घर में इनसे खिले, मेहमानों का वास।।2 ,




 देय मुझे आनंद है, चाय पकोडे संग।


 मन को हर्षित ये करे, स्वाद करे है दंग।।3




जीवन की ये जरूरत , तन-मन की ये जान।


हर कोई पीता इसे, बालक-वृद्ध-जवान।।4,




इसको पीते विश्व-जन, भरे फूर्ति विश्वास।


 है आतिथेय भव्य जो, आती जन-मन रास।।5




चाय-पकोड़े संग में, लाए मुख मुस्कान।


हो थकान सब दूर है, भरे ताजगी जान।।6




रह तनाव अति दूर है, करता दर्द तमाम।


फिर हम करते वाह हैं, लिये चाय के जाम ।।7




 सरदी में इसकी सदा, होती जय जयकार।


ठंडी ठिठुरन टाल के, देती लाभ हजार।।8,




चाय-पकोड़ों  की विविध, किस्में संग प्रकार।


हर्बल अदरक चाय भी, प्याज पकोड़ी सार ।।9




करे दर्द को दूर  है, अदरक तुलसी की चाय।


 सौंफ-सौंठ के संग यह, औषध है बन जाय ।।10




 लेमनवाली चाय का, कोई नहीं जवाब।


करे दस्त को दूर है, फूर्ती भरे जनाब ।।11


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