वाम सवैया में विषाद तजो नर
डॉ मंजु गुप्ता
विषाद तजो नर सोच निदान करे दिल ध्यान धरो प्रभु न्यारा।
मिटे जग का अँधियार सदैव करे मग दीपक खूब उजारा।।
अभेद रहे सम हो मन धार लगे हर मानव चेतन प्यारा।
दिखे सब नेक पुनीत सुनीत चराचर एक लगे जग सारा।। डॉ
उदाहरण – माँ गंगा * वाम सवैया
सुशीतल धीर बहे जल गंग बने हम माँ सम हों अभिरामी।
विश्व हित पालक जीवन दे हम भी उसके सम हों हित कामी।।
निरंतर वेग लिये बढ़ती हम भी उसके सम हो सहगामी।
समाज सुधार सुकाम करें हम संबल दे वह अंतरयामी।।
स्वरूप लगे अति निर्मल पावन निश्छल प्रेमिल कोमल न्यारा।
अमीर - गरीब सभी कर स्नान नहीं यह भेद करे जल प्यारा।।
कटे मन पाप गुनाह अशुद्धि तभी शिव ने इसको सिर धारा।
सभी इसकी जय बोल पुकार नमामि करे जग माँ जन सारा।।
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