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सत्यमेव जयते

 

कृपाण घनाक्षरी  सत्यमेव जयते

डॉ. मंजु गुप्ता


होती जय सत्यमेव,


 पुराणों में भरा भेव,


 वेद वाणी  कहे देव,




सत्य बोल  मूल्य सार।




विचार बनते  शुद्ध,


बने तब राम बुद्ध,


कुविचार करें  युद्ध,


दैत्य सम होती हार।।




यह करे पाप नाश,


बाँधे यह प्रेम पाश ,


भरे पुण्य मनाकाश,


  बने सच  मोक्ष धार।




होता तब भाईचारा,


लगे हर जीव प्यारा,


बसे उर धर्म सारा,



 देता यह भव तार।। 

 


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