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प्रभु कान्हा जन्मे जेल

 

प्रभु कान्हा जन्मे जेल

त्रिभंगी छंद

डॉ मंजू गुप्ता, वाशी , नवी मुंबई।

वर्षा था जन्म काल ,  आए थे कृष्ण लाल ,  की थी लीला कमाल, विष्णु रूप धारे।

काली बदरी विशाल ,पवन बहे चरम चाल,गरजे बिजली त्रि- काल, लीलाधर प्यारे।।



तट युमना राधा , कान्हा साधा , तोड़े गगरी ,   दे गारी।

प्रभु नटखट प्यारा, नंद दुलारा  ,दृग का तारा , उपकारी ।।

 प्रभु छेड़े प्यारी , मग गलियारी , जग गिरिधारी, बलिहारी।

जग प्रेम बताना , रास दिखाना , माखन खाना, हितकारी।।


बसो हृदय नंद लाल , कमल नयन कंठ  माल , पीत वसन कृष्ण  डाल , मोरपंख सोहे।


 छवि मनहर  भाय श्याम , जपती प्रभु सुबह शाम , पावन है कृष्ण नाम , लीला  है मोहे ।।

निधिवन में करें रास , गोपी की प्रेम प्यास , श्रद्धा की भक्ति आस , कान्हा है प्यारा।



मथुरा में जन्म आज , करे हृदय ईश राज , गीता का तारा।।

 


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