प्रभु गुरु नानक - सुंदरी सवैया
डॉ मंजु गुप्ता
गुरुनानक का गुरुपर्व मना जग चिंतक गर्व सदा करते हैं।
अवतार धरा पर ईश स्वरूप लिए वह कष्ट सभी हरते हैं।।
जग में उन के उपदेश बड़े हित से परमात्म हिया भरते हैं।
गुरु दिव्य कथा उनकी सुन शीश सभी दर पै उनके धरते हैं।। डॉ मंजु गुप्ता
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* सुंदरी सवैया* में * बिन वस्त्र गोपियों नहाना*
सब नार नहाय नदी यमुना में थीं प्रभु का तब रास बहाना।
हरि कृष्ण बुरा महसूस करें उनका बिन वस्त्र सदैव नहाना।।
तब कृष्ण चुराय सभी परिधान उन्हीं सब को यह सीख कहाना।
जल देव निसर्ग सभी अपमानित हैं यह पाप सदैव ढहाना।। डॉ मंजु गुप्ता
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सुंदरी सवैया में कबीरा
करना पड़ता मन को बस में प्रभु से जुड़ जाय उमंग कबीरा।
रखना अपना हरि राह सदा मन धीरज हो न तरंग अधीरा।।
रच छंद मिले तब ध्यान कृपा फिर चक्षु खुले मन शुद्ध शरीरा।
रट अंतर में प्रभु ज्ञान मिला बन दास कहे जग मान फकीरा।।
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