Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

पर्यावरण और प्रकृति

 

पर्यावरण और प्रकृति       

कुदरती धरोहर 

सत- रज - तम प्रकृति से निर्मित ' ओ '

   पंच तत्वों से  रचित मानव  को

जीने के लिए  जरूरी हैं ये पंचतत्व

किन्तु मानव जाति निज स्वार्थ के लिए 

भौतिक दौलत वास्ते

कर रहा नित्य सदाबहार प्रकृति , सृष्टि का  दोहन 

ऐश , आराम के लिए   करता इनसे खिलवाड़ 

ईश के कुदरती रंगों  को बेरंग करने में लगा 

पोषिता धरती माँ पर कर  रहा जड़ , चेतन पर 

 अणु बमों से  बेखोफ आघात 

जल , जमीन ,  समीर , अग्नि, आकाश  पर 

सृष्टि क्रम कर रहा है मानव सर्वनाश 

धरा को प्रदूषित कर

 अब एवरेस्ट , मंगल , चाँद पर कर रहा प्रदूषण

समुद्र , नदियों का रुख मोड़ के 

गंदगियों को घोल के  

दैवीय , प्राकृतिक आपदाओं को बुला रहा 

सुनामी , भूकंप , बाढ़ , सैलाब , सूखा , अकाल 

से जिंदगियों को बदरंग करवा रहा 

साम्राज्यवाद की सोच से 

रासायनिक हथियारों , जहरीले बम , बारूदों के धुएँ से

ओजोन  परत के  छेद को बढ़ा के 

मौसमीय चक्र के मिजाज को असंतुलित करके 

ग्लोबलवार्मिंग  का तपता सूूूरज 

धरा प्रकृति वनों , चराचर में लगा रहा आग 

पेड़ों ,वनों  को काट के 

पर्यावरण को  प्रदूषित कर  रहा 

हिंसक बन अनमोल जैवविविधता पर कर रहा प्रहार 

हे मानव !अब तू जाग 

मानवता से चेतना के दर खोल 

तामसिक महाप्रलय  के दागों  को

तू  सात्विकता की धार में धो 

कुदरती सम्पदा का कर सम्मान 

परस्परोपग्रहो जीवनाम  को मान 

अहिंसक वृतियों , वैदिक संस्कृतियों को दे मान 

तभी अनन्त , असीम  कुदरत का कुदरती करिश्मा   

प्राकृतिक  धरोहर का तन-मन-जन- जग  में खिलेगा ।                                      डॉ मंजु गुप्ता 


Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ