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नवरात्रों में माँ दुर्गा आई

 

नवरात्रों में माँ दुर्गा आई


गीतिका

डॉ मंजु गुप्ता


 सर्व विद्या बहुल प्रेमा , जग कृपा माँ कीजिए।


 दानवी अवगुण भरे मन, बुद्धि  जन को दीजिए।।


मौन होकर सत्य आँखें , फेर कर गूँगा  हुआ।


आज माता चेतना भर , जागने की  है  दुआ।।



 काल का  दिन हर्षमय है , दिव्य माँ  नवरात्र है।


 मातु की जग में दया हो , शक्ति - ऊर्जा यत्र है।।


 लाल चुन्नी ओढ़ माँ है , द्वार जग घर आ गयी।


सिंह का वाहन  बना के , झूम के माँ छा गयी।।



 लाल माँ की  चुनरिया है,   नित्य देखूँ  सामने।


दिव्य मूरत आपकी है, मार दानव आपने।।


भाविनी सत्ता सत्य रूपा , पार्वती जग तारिणी।


क्रोध माया मोह मेरा , माँ करो संहारिणी।।



 ज्ञान मुझको छंद का दें , प्रार्थना सुन लीजिए।


भक्ति श्रद्धा मन जगा दो , प्रेम मुझ से कीजिए।।


  डंडिया से झूम गरबा, द्वार तेरे नाचती। 


अंत तेरी बाँह में हो , गीत तेरे बाँचती।। 



हाथ जोड़ूँ प्रार्थना में ,नित्य करती साधना।


सिद्ध करना काम सारे , पूर्ण  करना कामना।।


रिद्धि का भंडार हो माँ , काव्य का पथ कीजिए। 


द्वार तेरे मातु आयी , रिक्त मन भर दीजिए।।



सौम्य मुख मुस्कान फैले, त्याग व्रत को धारिए।


साधना माँ की सदा हो, रात-दिन भी वारिए।।


वास होता शुद्ध मन में , सोच ऊँची कीजिए।


भक्ति में हम डूब जाएँ , मोक्ष हमको दीजिए।।



निष्कपट मन कर्म से ही, ध्यान माँ का धारिए।


 हो प्रतिष्ठित माँ हृदय में, सूर्य-सा तप वारिए।।


शील करुणा सहजता को, दिव्य पावन जानिए।


राह हमको भव्य देती , धर्म पथ को मानिए।। 



भाग्य मेरे जाग जाए, शीश पर कर राखिए।


भोग छोले का लगाती, आप इनको चाखिए।।


 भक्त सुमिरन चाव से है, आस उनमें जाग दो।


चित्त में अवगुण भरे हैं, सर्व मेरे त्याग दो।। 


 


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