मुक्तक में हिंदी दिवस
डॉ मंजु गुप्ता
1
हिंदी मैं गर्व से सिखाती हूँ,
हिंदी मैं शान से पढ़ाती हूँ ,
हिंदी से जुड़ी जीविका मेरी,
हिंदी में ओढ़ के बिछाती हूँ ।।
2
है सुरवाणी से जन्मी हिंदी ,
है यह देश के भाल की बिंदी ,
राष्ट्रसंघ ने भी महिमा जानी ,
भारतवासी की भाषा हिंदी ।।
3
है हिंदी युगों से महारानी ,
जन - मन - गण के भावों की रानी ,
वीणावादिनी की वंदना बन ,
गूँजे है कवि-उर में पटरानी।।
4
ये आन्दोलन की बनी लग्नेश ,
ये है तिलक का भी पर्व गणेश ,
गोरे राज गुलामी में भड़की ,
बन के आजादी का अग्निवेश ।।
5
है हर भाषा का यहाँ सम्मान,
है विविधताओं से देश महान ,
विभिन्न भाषा - बोली से इसकी ,
बना है हिंदी से हिन्दुस्तान ।।
6
अश्क - मुस्कान की भाषा हिन्दी,
जोड़े प्रांतों के दिल को हिंदी,
भारत की राजभाषा बनी पर,
न बनी अभी राष्ट्र भाषा हिंदी ।।
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