वीणा वादनी माँ ! मंगलाचरण
डॉमंजू गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई
हे बुद्धि दात्री,
हे भाव धात्री।
हे शब्द दानी,
तू छंद ज्ञानी।।
हो मृदुल वाणी ,
संपूर्ण प्राणी ।
गुण से भरो माँ,
उर तम हरो माँ।।
वरदान दे दो,
तुम ज्ञान दे दो।
तुम आस में हो
हर साँस में हो।।
अंतर खिले माँ,
मन भी मिले माँ।
मैं द्वार आयी,
मुझ में समायी।
माला चढ़ाऊँ,
दीपक लगाऊ।
गुणगान गाऊँ,
आशीष पाऊँ।।
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