Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

माँ है ईश्वर का रूप जयकारी छंद

 

माँ है ईश्वर का रूप  जयकारी छंद

डॉ मंजु गुप्ता



माँ होती  जग का आधार।

 करती सुंदर घर - संसार।

 करे मधुर सबसे  व्यवहार।

गढ़ती सदा सुखी परिवार।

करते उसका वेद बखान।

 सीता  - सी है बड़ी महान। 

दुर्गा , लक्ष्मी का धर रूप।

आती जगत में माँ स्वरूप।

संस्कृति को  वह देती  धार ।

उससे जिंदा हैं त्योहार।

करती सारे रस्म - रिवाज।

परंपरा की वह आवाज ।

सर्जन शक्ति उसमें अपार।

 करे कोख में प्रभु दीदार।

माता  है रत्नों की खान।

जन्मे  शिशु वह ध्रुव समान।

करे न बेटी , शिशु में  भेद।

समता की दीवार अभेद।

पन्ना का वह है बलिदान

    रखती  जिंदा हिंदुस्तान।

बनके आती वह भगवान।

गले लगाती है संतान।

 करें नहीं उसका अपमान।

दें  हम उसे  मान -सम्मान।।


Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ