कोरी मिट्टी को सोना करते
गीत
डॉ मंजु गुप्ता
शिक्षा जगत के प्रतिमान हम ,भारत का अभिमान।
कर्णधार हम भविष्य का बन , छात्रों को दे ज्ञान ।।
कलियों की - फूलों की हम तो,
शिक्षा की हैं चाह।
तूफानों से लड़ने की हम
उन्हें बताएँ राह।।
कोरी मिट्टी को सोना करके,बनते हम मुस्कान ।
व्योम के इन परिंदों में हम,ऊँची भरें उड़ान ।।
पीढ़ी दर पीढ़ी शिष्यों को ,
दें विद्या संस्कार।
हमीं ही ज्ञान परंपरा का ,
विविध शास्त्र भंडार।।
लगे छात्र-छात्रों को हमरी, मीठी मधुर जुबान।
राष्ट्र प्रथम संग हम पढ़ाएँ , संस्कृति का सम्मान।।
जिंदगियों को तराशना है,
काम हमारा जान।
चमका के घटाओं में सूर्य,
चीर देय अज्ञान ।।
महका के जीवन की बगिया , जगमगाएँ जहान ।
मौसम के परिवर्तन की हम ,मधुर सुहाना गान ।।
जिस पद पर तुम जहाँ रहोगे
आएँगे हम याद।
अँधेरी राह में दीपक बन,
करें हमीं आबाद।।
संभालते हैं हम जगजीवन , सिखाय तुम्हें विधान।
बुलंदियों को छूने की हम , बने मूल्य सौपान।।
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY