Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

जन्मे कृष्ण मुरारी

 

जन्मे  कृष्ण मुरारी

डॉ मंजु गुप्ता 



मथुरा की  कारा में जन्मे

 भादों  में मोहन प्यारा


मथुरा में  जब पाप बढ़ा था ,16

कंस से लोग घबराए 14

वसुदेव  -देवकी जेल गए ,

रिश्ते कुल  के थर्राए ।

देने   जग में ईश  सहारा ,

आया आँखों को तारा।।

भादों  में मोहन प्यारा।।


बेड़ियों में उनको जकड़ के ,

पहरा  कड़ा था  बिठाया ।

  क्रूर कंस के अनाचार ने 

जुल्म उन पर  करावाया।।

    मेटने अमर्ष अंधियारा

आया तब  जगत दुलारा

भादों  में मोहन प्यारा।।



हुई देवकी की गोद  हरी ,

ईश   ने कृपा  बरसायी ।

भाद्रपद की  कृष्ण अष्टमी ,

घोर काली रात आयी।

द्वापर युग का वह उजियारा

आया था गिरिधर न्यारा।।

भादों में मोहन प्यारा।


जन्में जेल में   नन्दलाला ,

 हुई लीला चमत्कारी ।

  सब पहरेदार थे  सो गए ,

    बेड़ी टूटी तब सारी।।

सगुण ब्रह्म वह जग आधारा

आया  धरा पर सितारा।।

भादों  में मोहन प्यारा।।



लाल  रख सूप में  वासुदेव  ,

 नन्दधाम  ईश पधारे ।

यशोदा को कृष्ण दे के वे ,

लल्ली  ले सिर पर  धारे ।।

माँ यशुमति ने दिल था हारा,

आया  घनश्याम हमारा।।

  भादों  में मोहन प्यारा।


चले  निडर देवकी के पास ,

लल्ली को उधर लिटाया ।

बेड़ी में वे फिर जकड़े थे ,

रुदन सुन के कंस आया।।

देख मचे तब हाहाकारा

आया मनमोहन म्हारा।।

भादों  में मोहन प्यारा।।


लड़की  को पटका  धरा  पे  ,

 बोली  कंस से योगमाया 

तेरा काल   गोकुल  में गया ,

 वही तेरा अंत आया ।।

नृप शाप योगमाया द्वारा।

आया  कान्हा मारनहारा।।

भादों  में मोहन प्यारा।।


खुशियों से  जन -मन हर्षाया ,

बजी आज है शहनाई 

लल्ला  होने की तब बाँटी ,

  गोकुल में नन्द मिठाई ।

गूंजे नटवर  का जयकारा

आया जग  पालनहारा।।

भादों  में मोहन प्यारा।।


दर्शन देने  भक्तों को हैं ,

आते हैं कृष्ण बिहारी

शोषण अधर्म जब   -जब  होता ,

 जन्मे तब कृष्ण मुरारी।।

 मंजू को कर प्रभु  जग पारा।

आया  कन्हैया सँवारा।

भादों  में मोहन प्यारा।।



Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ