जन्मे कृष्ण मुरारी
डॉ मंजु गुप्ता
मथुरा की कारा में जन्मे
भादों में मोहन प्यारा
मथुरा में जब पाप बढ़ा था ,16
कंस से लोग घबराए 14
वसुदेव -देवकी जेल गए ,
रिश्ते कुल के थर्राए ।
देने जग में ईश सहारा ,
आया आँखों को तारा।।
भादों में मोहन प्यारा।।
बेड़ियों में उनको जकड़ के ,
पहरा कड़ा था बिठाया ।
क्रूर कंस के अनाचार ने
जुल्म उन पर करावाया।।
मेटने अमर्ष अंधियारा
आया तब जगत दुलारा
भादों में मोहन प्यारा।।
हुई देवकी की गोद हरी ,
ईश ने कृपा बरसायी ।
भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी ,
घोर काली रात आयी।
द्वापर युग का वह उजियारा
आया था गिरिधर न्यारा।।
भादों में मोहन प्यारा।
जन्में जेल में नन्दलाला ,
हुई लीला चमत्कारी ।
सब पहरेदार थे सो गए ,
बेड़ी टूटी तब सारी।।
सगुण ब्रह्म वह जग आधारा
आया धरा पर सितारा।।
भादों में मोहन प्यारा।।
लाल रख सूप में वासुदेव ,
नन्दधाम ईश पधारे ।
यशोदा को कृष्ण दे के वे ,
लल्ली ले सिर पर धारे ।।
माँ यशुमति ने दिल था हारा,
आया घनश्याम हमारा।।
भादों में मोहन प्यारा।
चले निडर देवकी के पास ,
लल्ली को उधर लिटाया ।
बेड़ी में वे फिर जकड़े थे ,
रुदन सुन के कंस आया।।
देख मचे तब हाहाकारा
आया मनमोहन म्हारा।।
भादों में मोहन प्यारा।।
लड़की को पटका धरा पे ,
बोली कंस से योगमाया
तेरा काल गोकुल में गया ,
वही तेरा अंत आया ।।
नृप शाप योगमाया द्वारा।
आया कान्हा मारनहारा।।
भादों में मोहन प्यारा।।
खुशियों से जन -मन हर्षाया ,
बजी आज है शहनाई
लल्ला होने की तब बाँटी ,
गोकुल में नन्द मिठाई ।
गूंजे नटवर का जयकारा
आया जग पालनहारा।।
भादों में मोहन प्यारा।।
दर्शन देने भक्तों को हैं ,
आते हैं कृष्ण बिहारी
शोषण अधर्म जब -जब होता ,
जन्मे तब कृष्ण मुरारी।।
मंजू को कर प्रभु जग पारा।
आया कन्हैया सँवारा।
भादों में मोहन प्यारा।।
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